अहंकारी विधियों से आप भीतरी चुनाव तो जीत सकते है, बाहरी आक्रमणकारी से राष्ट्र की रक्षा नही कर सकते हैं

अहंकारी की पहचान क्या है?
वह आज के हालात में भी अपने ही देशवासियों को एकजुट हो जाने का आह्वाहन नही कर सकता है, क्योंकि बीते कल में इसी मुँह से उसने देशवासियों को अपने-पराये की दीवार से खुद ही तो बांटा था।
अहंकारी आदमी team नही बना सकते है। दुनिया की सबसे mighty पार्टी हो कर भी छोटी से, नयी नवेली दो दिन पार्टी से मिली पराजय , वो भी 63/70 के साथ - ऐसा परिणाम वही राम-रावण युद्ध वाली स्थति का सूचक है- की पार्टी भले ही mighty बनाई हो, मगर वो भीतर से खोखली है -क्योंकि वह अहंकारी प्रक्रियाओं और विधियों से प्राप्त करि गयी थी। ऐसी उपलब्धि समाज में अपने-पराये की दीवार बना कर प्राप्त हुई है,  ये उपलब्धि राष्ट्रीय एकता की आहुति दे कर बनाई गयी है।

रावण को अभिमान की कीमत अपने ही परिवार, अपने समाज और अपने देश का विध्वंस करके देना पड़ा था।

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