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घृणा कैसे आती है, और क्या करती है आपके भीतर में

घृणा की भावना अतार्किक और अंधी होती है। घृणा मस्तिष्क के बौद्ध को क्षय कर के उत्पत्ति होती है।  घृणा न्याय और समानता की बौद्धिक कौशल का नाश करके प्रकट होती है।  घृणा आईना देखना बिल्कुल भी पसंद नहीं करती है।  घृणा प्रवेश करती है कुछ हल्के फुल्के , लुभावने हास्य-परिहास में लिपट कर, जब व्यक्ति बेसुध हो, सजग-सचेत न हो घृणा की प्रवेश करने के फ़िराक के प्रति।  घृणा कभी तोकोई joke बन कर, कभी कुछ अर्धसत्य तथ्य , ज्ञान जानकारी बन कर, या दोस्तों की मधुर बतकही बन कर प्रवेश का लेती है। घृणा किसी के भी प्रति उत्पन्न हो सकती है।  घृणा की औषधि होती है दया, न्याय, समानता, संपूर्ण ज्ञान और आत्मसाक्षात्कार।

Nine quotes about Time

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