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न्यू यॉर्क टाइम्स लेख का हिंदी अनुवाद- भावनात्मक उत्तेजना से अनुवाद और उच्चारण में उत्पन्न भ्रम की घटना

प्रभावशाली अमेरिकी समाचारपत्र 'न्यू यॉर्क टाइम्स' द्वारा 8 अक्टूबर को प्रकाशित किये गए एक लेख जिसका शीर्ष था "भारतीय छात्रों के लिए एक असत्यवान शिक्षा पाठ्यक्रम" (False teachings for Indian students) का ...

The UPSC C-SAT Issue and the alleged anti-Hindi exam process

It seems like the Hindi speaking UPSC candidates are seeking a political solution to a technical challenge before them of passing the C-SAT (civil services aptitude test).    We don't expect any other thing than 'Politicing' when such candidates come around through UPSC into the bureaucracy. That India's fate is in the hands of Idiots and buffoons is a foregone conclusion now, who come in various shapes and forms such as the Bureaucracy, Politicians and the vernacular news media.    C-SAT consist of logical reasoning, language comprehension, analytical ability-those very mental skills which make up the IQ(intelligent quotient) of a person. Being unable to clear this exam-the obvious failed candidates are lobbying up as "Rural background,hindi speaking candidates" (being discriminated against systematically through the CSAT).     From a distance it should be a default conclusion that a candidate who cannot come through the test of these brain skills ...

हिंदी भाषी -अंग्रेजी भाषी विवाद

यद्यपि हिंदी मेरी मात्रभाषा है और यह लेख भी हिंदी भाषा में लिखा है , मगर मैं हिंदी भाषा के लिए किसी दया भाव से यह विचार नहीं लिख रहा हूँ। मैं यथासंभव निष्पक्षता और निर्मोह के ...

'स्यूडो' विचार संकृति वाला एक देश

"सेक्युलेरिज्म" (यानि राज्य विधान और धार्मिक विधानों को अलग-अलग रखने की परंपरा, जिसका मूल स्रोत है सामाजिक संवाद में ईश्वर और आस्थावानों का सीधा सम्बन्ध, बिना किसी ब्राह्म...

अपशब्द क्या हैं, और उनका भाषा विज्ञानं की दृष्टि से क्या योगदान होता है ? Part 2

अपशब्दों से ही मिलती जुलती क्ष्रेणी दो अन्य व्यक्तव्य भी है - अपमान-जनक (insulting ) शब्द, और आपत्ति-जनक (objectionable ) शब्द ।   अपमानजनक शब्द सीधे-सीधे मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखते हैं । यह सत्ता-प्रतिद्वन्द से प्रेरित होते है । इन्हें Disparaging शब्द भी कहा जाता है । इनके उदाहरण है - "तुम कभी भी कोई काम ठीक से नहीं करते । " (तर्क संगत दृष्टि में ऐसा कोई मानव है ही नहीं जिसने सब कुछ गलत किया हो । स्पष्ट रूप से इन वाक्यों में किसी की एक गलती पर उसे जीवन परयान्त गलती करने का इलज़ाम दे दिया गया है । ) भाषा के कुछ स्वरुप तो मूल से ही व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक सत्ता को चुनौती देते हुए बने है । जैसे "क्या बे , तू क्या कर रहा है ।" कुछ उपभाषाओँ में तो ये सांस्कृतिक है की साधारण वार्तालाप में वह चुनौती पूर्ण शब्दों का प्रयोग करते है । इन उपभाषाओं में सम्मान के शब्द कमजोरी और आत्मविश्वास की कमी का प्रदर्शन माने जाते हैं ।     अपमान जनक शब्द मूलतः तो कोई अपराध नहीं है , मगर किसी घटना अथवा अपराध में इनके योगदान पर कार्यवाई होती है । अपमानजनक शब्दों के प्रभाव में आपसी र...

अपशब्द क्या हैं, और उनका भाषा विज्ञानं की दृष्टि से क्या योगदान होता है ?

अपशब्द क्या हैं, और उनका भाषा विज्ञानं की दृष्टि से क्या योगदान होता है ?  साधारणतः वाक्य में, अथवा किसी वार्तालाप में बिना किसी तर्क के प्रवाह से, यों ही अर्थहीन तरह से प्रेषित करे गए वह शब्द जो हमे किसी मलिन (गन्दा ) ,अशिष्ट वस्तु का स्मरण कराते हैं , वह अपशब्द होते है ।     यहाँ कुछ विचार आवश्यक है । सबसे पहले की (अप )शब्द का प्रयोग वार्तालाप के विषय से किसी स्पष्ट तर्क से नहीं जुड़ा होना चाहिए । अर्थात अगर शब्द किसी तर्कसंगत रूप से विषय से सम्बन्ध रखता है तब वह अपशब्द नहीं है,भले ही वह किसी मलिन वस्तु का स्मरण कराता हो ।    साधारणतः यौन , यौन क्रिया , प्रजनन प्रक्रिया आदि से सम्बंधित शब्दों को अपशब्दों के लिए प्रयोग करा जाता है । हालाँकि फिर इस प्रकार के प्रयोग के लिए इन शब्दों के किसी स्थानीय रूप का प्रयोग होता है , स्थापित भाषा के स्वरुप का नहीं । स्थापित भाषा के स्वरुप वाला शब्द का प्रयोग वैज्ञानिक , चिकित्सीय अथवा न्यायायिक तथ्य के सन्दर्भ में किया जाता है ।    भाषा में अपशब्दों का प्रयोग मानव मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखता है । मनुष्य अपशब्...

निबन्ध क्यों लिखे जाते हैं ?

निबन्ध क्यों लिखे जाते हैं ?   मुझे गहरा यकीन है की कम से कम 90% हम भारतीय तो यही समझते हैं की निबन्ध-लेखन का मकसद किसी परीक्षा , जैसे लोक सेवा आयोग , या 12वी के ISC Board में छात्रों की अंग्रेजी भाषा में कुशलता नापने का होता हैं |      निबन्ध और ब्लॉग लेखन में काफी अंतर होता है ।  एक वेबसाईट (http://owl.english.purdue.edu/owl/resource/685/01/) से प्राप्त इस प्रश्न का उत्तर की 'निबन्ध-लेखन का सही प्रयोजन क्या होना चाहिए' कुछ इस प्रकार है :-          अंग्रेजी भाषा में निबन्ध के लिए शब्द 'Essay ' को अधिकाँशतः लोग ये समझते है की एक प्रकार की लेखन-क्रिया को Essay कहा जाता है | मगर अंग्रेजी के शब्द Essay का मूल शब्द जो की फ्रेंच भाषा के प्रभावों से आता है , Essay-लेखन के सही प्रयोजनों की समझने में मदद-गार होगा । फ्रेंच भाषा में भी इसका मूल शब्द लेटिन भाषा से आता है जो की exigere है | इस शब्द का अर्थ होता है " जांच करना , परीक्षण करना , या सीधे शाब्दिक मूल में 'अर्थ निकलना' । "         तो इस प्रकार Essay शब्द ...

'बिगेट' का अर्थ

Bigotry (बिगेट ) का अर्थ हिंदी भाषा के शब्दकोशों में कट्टर, अड़ियल इत्यादि दिया गया है । मगर भाषा-अनुवाद की असल दुविधा यह रहती है की न सिर्फ शब्द, वरन उसके सही भाव को भी अनुवाद करी गयी भाषा में परिवर्तित करना चाहिए । उदहारण के लिया अब Bigot को ही ले लीजिये । बाज़ार में उपलब्ध शब्दकोष के माध्यम से तो कोई भी छात्र यह समझ लेगा की जो व्यक्ति किसी वस्तु को पाने के लिए हट करे जब वह वस्तु उसे प्राप्त नहीं हो सकती तब वह Bigot हुआ ।      है, की नहीं? अब खुद ही सोचिये , “अड़ियल” से तो कुछ भाव ऐसा ही आता है । या फिर की ....वह व्यक्ति जो सिर्फ अपनी ही चलता है वह Bigot है । अब यह अर्थ सुनने के बाद कौन पसंद करेगा एक समालोचनात्मक चिंतन के भाव में अपने मस्तिष्क को डाल कर यह प्रशन करना की अगर “बिगेट” का अर्थ होता है 'वह जो सिर्फ हर समय अपनी ही चलता है ', तब फिर यह कैसे तय होगा की किस विषय में या किसी परिस्थिति में किसकी चलनी चाहिए ।     साधारणतः , हम लोग बिगेट से अर्थ निकलते है , "जिद्दी", या फिर "हट्टी "। और फिर जिद्दी का अर्थ समझने के लिए अपने बाल्य काल का उदाहरण ले लेत...

भाषा परिवर्तन की मिथ्या में खोता हुआ विवेक

भाषा के महत्व को क्या कभी भी कम आँका जा सकता है / भाषा का मनुष्य के विकास में जो महत्त्व है उसकी जितना भी चर्चा करें वह कम होगी / मगर दुखड़ा तब होता है की हम सारा का सारा श्रेय भाषा को देने की भूल कर बैठते है / भाषा के अलावा मनुष्य के विवेक की चर्चा होना भी उतनी ही जरूरी है / तर्क में अक्सर भारतीय यहाँ पर भ्रमित हो जातें है / ठीक है एक वस्तु, भाषा , बहोत महत्वपूर्ण  है  , मगर ऐसा नहीं की भाषा अकेला ही सारा कार्यभार संभाली हुयी  है   / तर्क संवाद , और स्कूली वाद-विवाद प्रतियोग्तायों में अक्सर यह तर्क -भ्रम देखने को मिलता है / ख़ास तौर पर जब अंग्रेज़ी में यह तर्क-संवाद प्रतियोगिता आयोजित करी जाती है / इंग्लिश भाषा की अध्यापक( अथवा अध्यापिका ) प्रतियोगियों को सिर्फ उनकी अंग्रेज़ी बोलने की काबलियत पर ही अंक दे कर पक्ष और विपक्ष के बीच में न्याय कर देते हैं / वाद-विवाद प्रतियोगितायों में न्याय करने के मुख बिन्दुओं में प्रत्योगियों की तर्क को समझाने की बुद्धि, उसको सुलझाने की और उनमे छिपे चुनातियों को चिन्हित करने, उनके निवारण करने की काबलियत को देखना चाहिए ...

हिंदी समाचार पत्रकारिता और हिंदी भाषी का गिरता बौद्धिक स्तर

अभी १० सितम्बर को हमने हिंदी दिवस के रूप में मनाया / मगर आज (यानी 06 oct 2012) अरविन्द के लगाये इल्जामे पर छिड़ी बहस को "आज तक " पर सुनने के बाद में फिर से यह दुःख मन रहा था की क्यों और कैसे हिंदी मूर्खो  द्वारा  बोले जाने वाली भाषा बनी और क्यों हिंदी भाष्य जगत मूर्खो की दुनिया बन गया है / बहस के संचालक सुमित अवस्थी बहस के दौरान केजरीवाल के लगाये इल्जामे को "अरविन्द की राजनीती करने की मंशा" का चौंगा पहनाने में लगे थे/ ऐसा करते समय सुमित से जो त्रुटी हो रही थी वह यह थी की वह अपने श्रोताओं में विधि-विधान के तकनीकी ज्ञान के प्रचार-प्रसार के पत्रकारिता के अपने कर्तव्यों का निर्वाह नहीं कर रहे था / असल में पत्रकारिता का एक कर्त्तव्य मस्तिष्क को ज्ञान का भोजन दे कर शांत रखने का भी है / अगर किसी तकनीकी ज्ञान, उदहारण के तौर पर मान लीजिये "सूरज पूरब से उगता है या पश्चिम से ?" , पर भी छिड़ी बहस में बहस का संचालक बहस को आगे बड़ने का मौका दे , यह कह कर की "पार्टी 'अ' का इलज़ाम है की सूरज पूरब से उगता है ", तो मस्तिष्क को बहुत अघात पहुचेगा/ अब ऐसे ...