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लोक सेवा आयोग का भारतीय मूर्खतन्त्र में योगदान

बड़ा सवाल है कि जो व्यक्ति दिन-रात एक करके मेहनत से पढ़ाई करता है और IAS/IPS बनता है, तो क्या वह इतनी मेहनत समाज सेवा में योगदान देने के लिए कर रहा होता है? ज्यादा बड़ी गड़बड़ है। यह कि देश मे आर्थिकी ज्ञान और सम्बद्ध चेतना कमज़ोर है। लोग *सेवा* (services) और *व्यवसाय* (profession) को एक ही विचार के पर्यायवाची शब्द समझते हैं। यह दिक्कत सिर्फ आम आदमी की नहीं है, बल्कि सेना और लोक सेवा में बैठे बड़े-ऊंचे पद के अफसरों की भी है।   नतीज़ों में इन लोगों ने तंत्र को मरोड़ दिया है, शायद अपने निजी स्वार्थ हितों में । यहाँ *सेवादारी* ज्यादा आर्थिकी लाभ का कार्य हो गया है *व्यवसायों* से । क्योंकि सेवादारों की आमदनी टैक्स दाताओं (कर दाताओं) से आती है, इसलिए यह लोग एक सुनिश्चित आय का भोग करते हैं। दूसरा, की निजी कंपनियों में जहां आय में वृद्धि कपंनी के मुनाफे से जुड़ती है, और इसलिए market force पर निर्भर करती है, वही सरकारी सेवादारों की आय में वृद्धि भी सुनिश्चित है --प्रतिवर्ष वार्षिक वृद्धि, एक निश्चित क्रम में पदुन्नति पर  वृद्धि, हर पांच वर्ष पर pay आयोग से महंगाई आने पर वृद्धि, हर तीन या छह महीनों में…
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अगर Lord Dicey भारत में पैदा हुए होते तो...

Lord Dicey ने जो न्याय के सिद्धांत दिए थे वह मात्र संभावना की बुनियाद पर टिके थे कि 'कोई भी इंसान खुद अपने विरुद्ध फैसले नही सुनाता है। ' Lord Dicey के सिद्धांत दुनिया भर के rational समाज मे स्वीकृत किये गए। मगर कल्पना करिए यदि यही कोई Dicey जैसा व्यक्ति भारत के ब्राह्मणवादी समाज मे ऐसी कुछ बात कहता तो उसको कैसे-कैसे उत्पीड़न से उसके सिद्धान्तों को स्वीकार नही किया जाता
-- यह dicey तो हर इंसान को झूठा और मक्कार समझता है
-- dicey को लगता है कि बस वही सच बोलता है।
- dicey दूध का धुला है, बाकी सब चोर हैं
-- भारत की संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है dicey। यहां राजा हरिश्चंद्र से लेकर सचिन तेंदुलकर तक ईमानदार लोग रहे हैं जो कि आउट हो जाने पर खुद ही पवेलियन लौट जाते है अंपायर के इशारे का इंतज़ार किये बिना।
- dicey जजों को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है कि सब जज झूठे होते हैं।
- dicey न्यायपालिका पर उंगली उठ्ठा रहा है,
-- dicey ने सारे जजों को चोर कहा
-- निर्वाचन आयोग का कहना है कि dicey ने कोई भी empirical सबूत नहीं दिया है कि जज झूठ बोल सकते हैं अपने खिलाफ मुक़दम्मे की सुनव…

Labour Exploitation reports by the CAG in the Indian Railways

Via Whatsapp unknownSo the tragedy-comic story goes something like this:-
The Railways does not keep any "gold standards" about the labour conditions for their contractors to follow. The contractors pick the half-baked railways contracts and make profit by exploiting the labour under sub-standard work conditions. As a result , when dis-hygiene comes around, the bureaucracy, instead of auditing on the labour conditions, employs the tactics of marketing through the powerful ministers and influential celebrities that the people should do the brooming by themselves.!Labour exploitation -->buisness profits--> marketing --> vote politics....An unimaginable poisonous cocktail where all the wrong is happening, and yet no one is responsible.