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ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये?

ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये? महान यूनानी दार्शनिक और चिंतक, एरिस्टोटल , जिनके पास अपने समय के समाज वालों के बहुत सारे सवालों और प्रकृति के रहस्यों का जवाब था , वे अक्सर लोगों के सवालों के जवाब देते-देते  विवादों और शास्त्रार्थों में दूसरो के साथ उलझ जाया करते थे। इस भीषण बौद्धिक द्वन्द के दौरान वे अपने जवाब को उचित सिद्ध करने की चेष्ट करते थे, और कई कई बार वे सिद्ध भी हो जाया करते थे। इसलिये उनके समाज के मान्य लोगों में उनका बहुत सम्मान हुआ करता था। अपने समर्थकों से प्ररित हो कर एरिस्टोटल ने ही ऐसे उपवन तथा वाटिकाओं को आरम्भ किया था जहां वे अपने शिष्यों के संग विचरण करते हुए समाज के सवालों का और प्रकृति के रहस्यों पर विमर्श करते हुए उनके गुत्थीयों को तलाशते थे। एरिस्टोटल के वे उपवन तथा वाटिका ही अकादमी कहलाने लगे जहां तत्कालीन यूनानी समाज के समृद्ध और उच्च कोटि वर्ण के लोग अपने बालको को एरिस्टोटल के पास भेजा करते थे विमर्श करते करते अपनी बौद्धिक कौशल को प्रवीण करने के लिए। वह अकादमी (academy ) भविष्य में जा कर ये आधुनिक कालीन पाठशालाओं की नींव बनी।  मगर एरिस्ट...

IAS Association की सोच क्या है भारतीय समाज को प्रजातांत्रिक प्रशासन व्यवस्था मुहैया करवाने के प्रति

तो जब private sector से लोगों को सरकारी क्षेत्र में सीधे सयुंक्त सचिव लिया जाने लगा है तो हमारे देश के नौकरशाह associations की माँगे हैं की IAS को भी sabbatical जैसी अवकाश की राहत दो कि निजी क्षेत्र में कुछ वर्ष कार्य के वापस IAS में join कर ले ! यानी सरकारी ज़मीदार साहेब लोगों को अपने पद के profits भुनाने के और अवसर दिये जाएं ! सरकारी सेवा अब सामाजिक हितों के किये त्याग नही, बाकायदा भोगवादी निजी मुनाफे का धंधा है ! आलम यूँ है कि हमारा प्रजातंत्र चूंकि हमारे विशिष्ट ब्रिटिश राज उपनिवेश तथ्यों की वजहों से उल्टे विधि पैदा हुआ है, इसलिए हमारे नौकरशाहों की खोपड़ी भी उल्टी ही है। उनके अनुसार प्रजातंत्र का वरदान सिर्फ IAS/IPS लोग है, न कि देश का आम आदमी जो समाज की दैनिक ज़रूरते पूरा करते हुए अपना व्यवसाय करता है ! कहने का मतलब है कि राजगीर मिस्त्री, बढ़ई, वेल्डर, लोहार , ग्वाल , किसान, चमड़े के कारीगर, motor गाड़ी के चालक, हवाई pilot ,समुद्री नाविक इत्यादि से कोई प्रजातंत्र नही बनाते है।इसको प्रजा तंत्र वरदान की क्या  ज़रूरत।  और प्रजातंत्र तो बनता है सिर्फ IAS या IPS लोगों से ...

रेफरी विहीन shouting मैच है भारत की राजनैतिक प्रशासनिक व्यवस्था

प्रश्न :- Via Mani M अपना मानना है कि यदि नरेंद्र मोदी लड़कपन में संघ दफ्तर नहीं पहुंचते और उसकी जगह शेयर बाजार पहुंचते तो वे अरबपति बने हुए होते । वे राजनीति में आए तो धुन ने ही उनको स...

शोषण करने की विद्या

* शोषण करने की विद्या* भेदभाव की व्यवस्था की नींव किसी न किसी तथाकथित अच्छे से दिखने वाले कारणों से ही करि जाती है। भेदभाव के कई प्रकार है। जातिगत, या vvip गत, श्रमिक-मालिक सबंन्ध , ...

Epic चैनल के विषय में

I am concerned about the promotion of this EPIC channel . Epic Channel on its face appears to be an India-centric version of knowledge channel as Discovery ®, or National  Geographic ®.    मगर एक तुलनात्मक दृष्टिकोण से epic चैनल और इन अन्य knowledge चैनल( ज्ञानवर्धन चैनल) में भेद समझ मे आएगा और इसकी वर्तमान काल मे सामाजिक -राजनैतिक भूमिका के पहलू खुलेंगे।   जानकारी के लिए यह मालूम हो कि epic चैनल reliance मीडिया ग्रुप से आया चैनल है और अधिकांशतः भारत की पौराणिक, सांस्कृतिक , शास्त्रीय और इतिहासिक धरोहरों पर ही केंद्रित है।  महज़ जानकारी प्राप्त करने की दृष्टिकोण से तो कोई दिक्कत नही है, मगर सामाजिक उपयोगिता के दृष्टिकोण से यह चेनल किसी विशेष राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करता हुआ दिखाई पड़ता है।   जानकारी के लिए यह भी बता दें कि दूसरे अन्य ज्ञानवर्धक चेनल जैसे कि discovery , national geographic और history इत्यादि के भारत मे प्रसारण के अधिकार भी reliance ग्रुप ने ही संरक्षित कर लिए हैं।     तुलनात्मक दृष्टिकोण से epic चेनल अन्वेषण (exploration) के स्थान पर रहस्यमयिता (mystici...

non-linear logic में भारतिय न्यायालय

भारतिय न्यायालयों की भी यही आलोचना होती रही है। यहाँ कुछ भी साधारण तर्क की परिधि में नहीं होता है। कब किसको क्यों bail (जमानत) दी जाती है, क्यों जल्लितकट्टू पर प्रतिबन्ध लगता है, ...

क्यों लबालब है भारतिय सामाजिक चेतना कुतर्क और कूट से

कभी कभी सोचता हूँ की भारतिय जनसँख्या में इतने कुतर्क और कूट (धोखा , भ्रम) आया कैसे । और जवाब में यही उत्तर मिलता है कि सदियों की ग़ुलामी और अथाह गरीबी से हमने खुद का मनोबल बनाये र...

denialism -- प्रमाण नियमावली की logical fallacy

denialism को गहरायी से समझने के लिए हमें निर्मल आत्मा (good conscience), तर्क (logic) और प्रमाण के नियम (laws of evidence) के पेंचीदा गठजोड़ को समझना होगा। सबसे पहले हमें तर्क और प्रमाण के नियमों की एक प्राकृतिक असक्षम...

Pervert justice and the Brahmanism

The precise behaviour which has been depicted by the term Brahmanism is its hypocrite social conduct, the crooked thinking, the pervert justices it has rolled out on the people who otherwise treated them with utmost respect. It is the victims of the Brahmanism who are today grouped as the Reserved SC/ST/OBC class.     It takes no rocket science to observe that the BJP is a sub-organization of a parent organization which is typically Brahman loaded, is therefore anti-reservationist, and continues to apply crooked thinking, pervert justices , hypocrite social conduct in almost all its actions.

अशुद्ध अंतर्मन के व्यवहारिक उत्पाद-- तर्क भ्रम, पाखण्ड और धूर्त न्याय तथा निर्णय

एक यह प्रश्न भी अन्वेषण का शीर्ष होना चाहिए की लोग तर्क भ्रम से ग्रस्त क्यों होते है।    शायद अंतर्मन का शुद्ध न होना सबसे बड़ा कारण है की लोग आसानी से तर्कभ्रम (fallacies) के शिकार हो ज...

वकील और न्यायधीशों में बौद्धिक गुणवत्ता की कमी है।

(व्यक्तव्य: 20 सितम्बर के समाचारों से सम्बंधित) वकील और न्यायधीशों में बौद्धिक गुणवत्ता की कमी है। 1)   ओला कैब टैक्सी प्रकरण में पीड़ित पक्ष ने एक याचिका डाली थी की वह गवाहों क...