IAS Association की सोच क्या है भारतीय समाज को प्रजातांत्रिक प्रशासन व्यवस्था मुहैया करवाने के प्रति

तो जब private sector से लोगों को सरकारी क्षेत्र में सीधे सयुंक्त सचिव लिया जाने लगा है तो हमारे देश के नौकरशाह associations की माँगे हैं की IAS को भी sabbatical जैसी अवकाश की राहत दो कि निजी क्षेत्र में कुछ वर्ष कार्य के वापस IAS में join कर ले !

यानी सरकारी ज़मीदार साहेब लोगों को अपने पद के profits भुनाने के और अवसर दिये जाएं ! सरकारी सेवा अब सामाजिक हितों के किये त्याग नही, बाकायदा भोगवादी निजी मुनाफे का धंधा है !

आलम यूँ है कि हमारा प्रजातंत्र चूंकि हमारे विशिष्ट ब्रिटिश राज उपनिवेश तथ्यों की वजहों से उल्टे विधि पैदा हुआ है, इसलिए हमारे नौकरशाहों की खोपड़ी भी उल्टी ही है।

उनके अनुसार प्रजातंत्र का वरदान सिर्फ IAS/IPS लोग है, न कि देश का आम आदमी जो समाज की दैनिक ज़रूरते पूरा करते हुए अपना व्यवसाय करता है ! कहने का मतलब है कि राजगीर मिस्त्री, बढ़ई, वेल्डर, लोहार , ग्वाल , किसान, चमड़े के कारीगर, motor गाड़ी के चालक, हवाई pilot ,समुद्री नाविक इत्यादि से कोई प्रजातंत्र नही बनाते है।इसको प्रजा तंत्र वरदान की क्या  ज़रूरत।  और प्रजातंत्र तो बनता है सिर्फ IAS या IPS लोगों से ।

अरे भाई , जब UPSC प्रवेश परीक्षा में कोई विषय लकड़ी काटने, लोहा पिघलाने, लोहा वेल्ड करने, पशु पालन और दूध निकालने , खेती करने, चमड़े को जोडने , मोटर गाड़ी चलाने, हवाई जहाज़ उड़ाने या समुन्दर में मार्ग ढूढ़ने और जीवन जी सकने का है ही नही, तो फिर इसका अभिप्राय यही है की हमारे संविधान की सोच के अनुसार यह पेशेवर लोग थोड़ा न प्रजातंत्र बनाने लायक माने गये हैं। भारतीय समाज की प्रशासन व्यवस्था को प्रजातंत्र बनाने के लिए आपको anthropology, sociology, psychology जैसे किताबी विषयों का ज्ञान आना चाहिए, या फिर IIT से अभियांत्रिकी या AIIMS से चिकित्सा विषय पढ़ कर फिर UPSC में भर्ती होना चाहिए !

यह है हमारे IAS association की सोच भारतीय समाज को प्रजातंत्र के संकल्प निभा सकने वाली प्रशासन व्यवस्था देने के प्रति !

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