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कच्चे तेल के गिरते हुए दाम और इसका रूस से सम्बन्ध

धीरे धीरे ऐसा लगने लगा है की कच्चे तेल के दामों में गिरावट एक व्यापक राजनैतिक साज़िश के तहत लायी गयी हैं। मगर शायद वह राजनैतिक कारक भारत से नहीं जुड़ा है। बल्कि रूस से सम्बंध...

on Germany winning the FIFA World Cup 2014

Germany has won the world cup. Possibly not relevant to this victory but I am reminded of how the German economy has been the only sustaining economy in the EU in the past few years. Germany has been a target of the US Espionage , as revealed by whistle blower Snowden-for reasons I still like to guess.     Germany has been a great performer in football for quite sometime although victory kept eluding them by acts of fate, not because of lacking efforts. Kahnu Kahn their goalkeeper has not vanished from my memory who played in the WC two editions ago.   Michael Schumacher, the F1 champion made his fans cry when he met with an accident while skiing. And his recovery from a longest medically induced coma was  a greater and more emphatic victory than all his F1s. It qualified supremely all his physical and mental endurances.     From the era of Hitler, I am reminded of the the fascist beliefs of his regarding the superiority of the German Aryans ...

भाजपा के जाली विज्ञापन

"अमेरिका मोदी से डरता है क्योंकि मोदी भ्रष्ट नहीं हैं।"--भाजपा द्वारा एक प्रचारित विकीलीक्स के नाम-अंतर्गत एक जाली विज्ञापन     बीते कुछ वर्षों में जिन-जिन देशों में जन-क्रांति हुई है वहां के तानाशाहों ने उसे "सीआईए (CIA)" का , "पश्चिमी देशों की साज़िश" , और यहाँ भारत में "फोर्ड फाउंडेशन (Ford Foundation) की साज़िश" करार दिया गया है।    जन-क्रांतियाँ चले आ रहे तंत्र को पलट देने का उद्देश्य पूर्ण करती हैं। स्पष्ट हो जाना चाहिए कि भाजपा और आप पार्टी के मध्य कौन सी पार्टी जन क्रांति से उभरी है? और कौन इस स्थापित तंत्र में बदलाव को रोकना चाहता है? किस पर फोर्ड फाउंडेशन से चन्द लेने का आरोप मथा जा रहा है (तब जब कि फोर्ड फाउंडेशन ने चंदे तो उनको राज्य की गैरसरकारी संस्थाओं को भी दिए हैं) और कौन स्वयं को "भ्रष्ट नहीं किये जा सकते हैं" कि दलील जनता में बेचना चाहता है।    "अब उल्लू मत बनाओ क्योंकि उल्लू बनना कोई अच्छी बात तो नहीं हैं।"- टीवी पर आने वाले एक विज्ञापन में दिया गया जन सन्देश।    वर्तमान में भारत और अमेरिका के व्यग्तिगत ...

अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम और भविष्य में भारत के लिए कड़ा रास्ता

   क्या यह भारत की विदेशनीति का आश्चर्यचकित करने वाला विरोधाभासी व्यवहार नहीं है कि हम रूस द्वारा यूक्रेन के क्राईमीया क्षेत्र पर अतिक्रमण कर लिए जाने पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे रूस पर प्रतिबंधो में उनका साथ नहीं दे रहे हैं?    क्या 21वी शताब्दी में आज भी कोई देश किसी दूसरे देश के क्षेत्र पर ऐसे अतिक्रमण कर सकता है? और क्या भारत ऐसे अतिक्रमण को जायज़ मानता है? तब यदि हमारे किसी भूभाग पर कोई यदि ऐसे अतिक्रमण करे तब क्या समूचे विश्व को हमे हमारे ही द्वारा उत्पन्न तर्कों में उत्तर देने का मौका नहीं मिलेगा?    शायद दुनिया वापस शीत युद्ध के दौरान वाले राजदूतिया समीकरणों पर लौटने लगी है। यह एक अशुभ समाचार होगा।    सुब्रमनियम स्वामी द्वारा लगाए गए कांग्रेस अध्यक्षा पर आरोप भी याद आते हैं। क्या रूस ने भारत से रिश्ते इतना गहरे "खरीद" रखे हैं।    क्या भारत फिर से कम्युनिस्ट ब्लोक से सम्बद्ध हो जायेगा जिसे कभी किसी समय श्री अटल वाजपायी जी की सरकार ने मुक्त कराया था? क्या हम फिर से एक "समाजवादी प्रजातंत्र" बनेंगे जिसका प्राकृतिक अस्तित्व...

यूक्रेन और क्रेमीया प्रकरण पर एक विचार

   पश्चिमी देशों ने हाल मे घटी कई सारी जन-क्रांतियों में सराहनीय धैैर्य प्रदर्शित करा है। जहाँ-जहाँ (मिस्र, लीबिया, सीरिया ) भी यह क्रांति घटी थी वहां के इतिहासिक पटल पर एक तथ...

आम आदमी पार्टी की आर्थिक और विदेश नीतियों पर एक विचार

आम आदमी पार्टी की अपनी कोई विशिष्ट आर्थिंक या विदेश निति नहीं है| वैसे सच बोले तो देश में बाकी दोनों बड़ी पार्टियों की भी कोई निति है क्या ? और छोटी क्षेत्रीय पार्टियों की क्या निति है?- कुछ नहीं | क्योंकि उन्हें कुछ ज्यादा आवश्यकता ही नहीं है अपने क्षेत्र से बाहर मुंह घुमा कर देखने की | हाँ कुछ एक पार्टियाँ विदेश से सम्बंधित विषयों पर कुछ-कुछ हल-चल करती है -- मगर विदेश से अर्थ सिर्फ पाकिस्तान, बंग्लादेश , नेपाल तक है | कुछ एक चीन को दुश्मन मानती है और कुछ एक चीन को आर्थिक प्रतिस्पर्धी | अमरीका को वामपंथी पार्टियाँ दुश्मन और "पूंजीवादी" ही मानती है |   आर्थिक नीतियों पर तो छोटी पार्टियों की निति तो एक शब्द में समझा जा सकती है - भ्रष्टाचार |    यह सारी नीतियाँ किसी फिल्मी प्रभाव में उत्पन्न है , किसी मूलभूत अध्ययन से निकले सिद्धांत पर नहीं आधारित हैं | संक्षेप में कहें तो -- जिसकी जैसी भावना, वही उसकी निति है | तथ्यों का संग्रह और अध्ययन किसी ने नहीं किया है |           आम आदमी पार्टी का उद्गम भ्रष्टाचार निवारण के आन्दोलन से हुआ है और वही यह तय ...

संस्कृति , मानसिकता और वैज्ञानिक मिशन के उद्देश्य

तमाम देशों के अपनी अपनी सभ्यता है और विचार हैं। यही विचार उनके वैज्ञानिक और अंतरिक्ष अनुसंधान के उदेश्य को तय करते हैं। उदहारण के लिए : अमेरिकी स्वयं को विश्व कल्याण का नेत्रित्व कर्ता मानते हैं। इसलिए मंगल गृह से सम्बंधित खोजों का अमेरिकन का उद्देश्य पराग्राही जीवन की खोज, जीवन क्या है, उसको समझना, और सुदूर भविष्य में जब धरती किसी खगोलिय कारण से मनुष्यों के रहने लायक न रह जाए तब विस्थापित करने के लिए तैयार करना है। चीनी लोग खपत-खोर(consumerist) किस्म के हैं और हर एक वस्तु की खपत करने का रास्ता दूंडते रहते हैं। उनका मंगल गृह का उद्देश्य है कि कभी सुदूर भविष्य में मंगल के खाद्यानों को मनुष्य के उपभोग के लिए धरती पर लाने का मार्ग प्रशस्त करना। तब जब मनुष्यों की बढाती आबादी धरती के खाद्यानों को पूरी तरह खपत कर चुकी होगी। चीन मौजोदा में धरती का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। भारतीय लोग आपस में अपने पडोसी से गुप-चुप प्रतिस्पर्धा और ईष्या के लिए जाने जाते हैं। हमारा मंगल गृह पर खोजों का उद्देश्य है वहां भारतीय तिरंगे को जल्दी से जल्दी, अपने प्रतिस्पर्धी से पहले फैलाना और वहां प्राप्त किये गए...

For once, this nation owes it to the Russians, owes it to the Gandhi's

For once, this nation owes it to the Russians, owes it to the Gandhi's . I am not sure , but even as I try to unsolve the issue of how the Jan Lokapal Bill can become a threat to national security , who may be having the maximum of black money stashed away abroad, and where did the Gandhi family get all their money from, I chanced upon certain bigger facts of our history, about the days of the Cold War , about the international relations which existed in those days between India and the USSR, between Pakistan and America, and ofcourse, the India-West&East Pakistan. It was only recently I stumbled upon another hard fact of diplomacy world--  Indians had not resisted the Russian invasion of Afghanistan in the UN, back in 1979. From today’s relations it appears really appaling as to why us, who had once been subjugated by the British and many other people, did not oppose suppression of some other country by another. It is mysterious in some ways until we explore the history a...