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ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये?

ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये? महान यूनानी दार्शनिक और चिंतक, एरिस्टोटल , जिनके पास अपने समय के समाज वालों के बहुत सारे सवालों और प्रकृति के रहस्यों का जवाब था , वे अक्सर लोगों के सवालों के जवाब देते-देते  विवादों और शास्त्रार्थों में दूसरो के साथ उलझ जाया करते थे। इस भीषण बौद्धिक द्वन्द के दौरान वे अपने जवाब को उचित सिद्ध करने की चेष्ट करते थे, और कई कई बार वे सिद्ध भी हो जाया करते थे। इसलिये उनके समाज के मान्य लोगों में उनका बहुत सम्मान हुआ करता था। अपने समर्थकों से प्ररित हो कर एरिस्टोटल ने ही ऐसे उपवन तथा वाटिकाओं को आरम्भ किया था जहां वे अपने शिष्यों के संग विचरण करते हुए समाज के सवालों का और प्रकृति के रहस्यों पर विमर्श करते हुए उनके गुत्थीयों को तलाशते थे। एरिस्टोटल के वे उपवन तथा वाटिका ही अकादमी कहलाने लगे जहां तत्कालीन यूनानी समाज के समृद्ध और उच्च कोटि वर्ण के लोग अपने बालको को एरिस्टोटल के पास भेजा करते थे विमर्श करते करते अपनी बौद्धिक कौशल को प्रवीण करने के लिए। वह अकादमी (academy ) भविष्य में जा कर ये आधुनिक कालीन पाठशालाओं की नींव बनी।  मगर एरिस्ट...

गैर–ब्राह्मण हिंदू समाज में ब्रह्म की पूजा क्यों नहीं करी जाती है

कहते हैं की गैर–ब्राह्मण हिंदू समाज में ब्रह्म की पूजा नहीं करी जाती है। धरती पर सिर्फ एक ही मंदिर था, पुष्कर (राजस्थान) में, जहां कि ब्रह्मा की पूजा होती थी। जानते हैं क्यों? पुराने लोग आपको बताएंगे कि तीनों महादेवों में सिर्फ ब्रह्म जी की ही पूजा नहीं करी जाती है क्योंकि उन्होंने एक बार झूठ बोला था । मगर आजकल ऐसा नहीं है। दरअसल ये चलन टीवी के युग में चुपके से ब्राह्मणों ने साजिश करके बदल दिया है ! क्योंकि ब्राह्मण लोग खुद को ब्रह्म की संतान बताते हैं, तो फिर वो कैसे अपने परमपिता, ब्रह्मा, की संसार में ऐसी अवहेलना होते देख सकते हैं। इसलिए उन्होंने थोड़ा हिंदूवाद, धर्म-पूजा पाठ, आस्था का चक्कर चलाया और नई पीढ़ी को हिंदू – मुस्लिम करके बेवकूफ बना लिया है। पुराने लोग आपको शायद ये भी बताते कि कैसे हिंदुओं का कोई भी त्रिदेव अवतार जिसकी पूजा हुई है संसार में, वो ब्राह्मण वंश में नहीं जन्मा। और यदि किसी त्रिदेव ने ब्राह्मण वंश में जन्म लिया भी, —तो फिर उसकी पूजा नहीं करी गई संसार ने। जैसे कि, — राम चंद्र जी — विष्णु अवतार, क्षत्रिय वंश में थे, और संसार में पूजा होती है भगवान क...

जन्मजात पंडित और व्यक्तिव का confidence का भारत के जनमानस पर धाक

हमारे एक मित्र, मxxष मिश्रा , कुछ भी लेख लिखते समय confidence तो ऐसा रखते हैं जैसे विषय-बिंदु के 'पंडित' है, जबकि वास्तव में ग़लत-सलत होते हैं। तब भी, उनके व्यक्तित्व में confidence की झलक होने से उनके लाखों followers है ! सोच कर मैं दंग रह जाता हूँ कि देश की कितनी बड़ी आबादी अज्ञानी है, जिसका कि जगत को पठन करने का तरीका ही मxxष मिश्रा जैसे लोगों के उल्टे-शुल्टे लेखों से होता है, सिर्फ इसलिये क्योंकि मxxष जी जन्मजात पंडिताई का confidence रखते हुए लोगों को आसानी से प्रभावित कर लेते हैं । भारतीय सांस्कृतिक परिवेश में तमाम प्रबंधन शिक्षा के गुरु लोग ऐसे ही नहीं बार-बार ' व्यक्तिव में confidence ' रखने की बात दोहराते रहते हैं। बल्कि वो लोग तो सफाई भी देते रहते हैं कि अगर आप के व्यक्तिव में confidence है, तब अगर आप ग़लत भी हो, तब भी आप अपनी बात को जमा सकते हैं। प्रबंधन गुरु लोग ग़लत नहीं हैं। हमारे देश की आबादी में औसत आदमी किताबी अध्ययन करने वाले बहोत ही कम हैं। ऐसे हालात में लोगों को किसी भी विषय पर सही-ग़लत का फैसला करने के संसाधन करीब न के बराबर होते हैं। ये देश अज्ञानियों ...

हिन्दू योग और बौद्ध योग में अंतर

योग जिसने दुनिया में भारत को पहचान दिलवायी, यह योग वो वाला नही था जो वैदिक धर्म से निकलता था। बल्कि वह जो बौद्ध धर्म के अनुयायिओं वाला योग था। अभी कुछ-एक वर्ष पहले थाईलैंड में एक छात्र दल मनोरंजन क्रीड़ा के खोजी अभियान के दैरान एक भूमिगत गुफा में प्रवेश कर गया था। फिर वह लोग नीचे उतरते चले गये और कक्षाओं व्यूह के बीच अपना रास्ता भूल बैठे थे। बहोत जबर्दस्त बचाव अभियान के बाद एक ब्रिटिश दल ने उन्हें बहोत दिनों बाद बचा लिया। हालांकि बचाव अभियान के दौरान थाईलैंड के अपने नौसैनिक दस्ते के एक सदस्य ने अपनी जान खो दी थी। बाहर निकलने पर छात्र दल ने बौद्ध योग संस्कृति के माध्यम से अपने मन और शरीर की क्रियाओं को नियंत्रित करने को अपना जीवन रक्षक प्रेरणा स्रोत बतलाया था। छात्र दल के शीर्ष ने न सिर्फ अपनी जान बचायी, बल्कि योग द्वारा विकसित सब्र, धैर्य जैसे गुणों से समूचे दल को विचलित होने से रोक, नियंत्रण बनाये रखा, विद्रोह नही होने दिया और सीमित भोजन, वायु, प्रकाश, और निराशा से भरे माहौल में भी किसी को टूटने नही दिया था। यह अंतर है बौद्ध धर्म के योग क्रिया और तथाकथित हिन्दू योग क्रिया...

The effects of Helmet laws on the Intellectual courage of liberated people

this kind of video is custom-generated just to spread scare ! Think critically, if u may, you should notice that Helmet is a mitigating device, not a preventive device. The better action is the preventing action, not the curative or mitigating action. A helmet makes ZERO contribution in preventing an accident. The helmet, may , IF AT ALL, come of use POST AN ACCIDENT, not before an accident. ___-____+____-___+____- Sometimes there is no actual horror in the story. It is only the work of cameraman by shaking the camera, taking some acute angle shots, and then the sound editors adding the background score , which give a feeling of scare. The Helmet wearing "inspirational" videos are in the same line. The logic of un-avoid-ability of the helmet device has never been found. The Video-makers generate them only from their own imaginary stories. One can create such "inspirational" stories for other devices as well -like, for driving gloves, the windsheeter jackets, the ...

Pervert justice and the Brahmanism

The precise behaviour which has been depicted by the term Brahmanism is its hypocrite social conduct, the crooked thinking, the pervert justices it has rolled out on the people who otherwise treated them with utmost respect. It is the victims of the Brahmanism who are today grouped as the Reserved SC/ST/OBC class.     It takes no rocket science to observe that the BJP is a sub-organization of a parent organization which is typically Brahman loaded, is therefore anti-reservationist, and continues to apply crooked thinking, pervert justices , hypocrite social conduct in almost all its actions.

अरुंधति रॉय भी इसे ब्राह्मणवाद मानती है

लालू प्रसाद अकेले नहीं हैं भाजपा और आरएसएस की राजनीति को ब्राह्मणवाद का आरोप लगाने में। भई कब तक पंडित जी की भावनाओं से तय किया जाता रहेगा कि क्या सही है और क्या गलत है ?  भक्...

अरुंधति रॉय भी इसे ब्राह्मणवाद मानती है

भई कब तक पंडित जी की भावनाओं से तय किया जाता रहेगा कि क्या सही है और क्या गलत है ?  भक्त गण, जो की अधिकांशतः पंडितजी लोगों का ही जमावड़ा है, वह pervert लॉजिक को मानता है। यानि सब कुछ उल्ट...

भाजपा में ब्राह्मणवादी हिंदुत्व और प्रवृत्तियां

1)खड़मास की वजह से छत्तीसगढ़ के नवनिर्वाचित भाजपा के मुख्यमंत्री राघुवर दास ने शपथ ग्रहण को टाल दिया था।(स्रोत: समाचार पत्र टाइम्स ऑफ़ इंडिया) 2) मानव संसाधन राज्यमंत्री श्रीमती स्मृति इरानी ने अपने निजी ज्योतिष के साथ 4लम्बे घंटे व्यतीत किये। 3)भाजपा में कूट-वैज्ञानिक आचरण ( pseudo-scientific) , वह जो वैज्ञानिक होने का छलावा करता हो) होने के आरोप पर भाजपा समर्थकों ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष अरविन्द केजरीवाल की इस्लामी और सूफी मजारों पर चादर चडाने वाली पिक्चरें प्रकाशित करी, शायद यह जताने के लिए की केजरीवाल "sickular" हैं। 4)  आरंभ के दो बिन्दों को तीसरे बिंदु से जोड़ने पर निष्कर्ष यही निकलता है की भाजपा समर्थकों में 'ईश्वरियता' और 'अंध-विश्वासों में मान्यता' के मध्य भेद कर सकने की योग्यता आज भी विक्सित नहीं है। और इसके प्रमाण-लक्षणों में निम्न तीन बिंदु हैं: 5) पाखंडी आसाराम बापू, बाबा रामपाल के अधिकाँश पालक भाजपा के भी समर्थक हैं ,और इन्हें लगता है की भाजपा ही इन "संतों" को पुलिस से बचा कर "हिंदुत्व" की रक्षा कर सकती है। 6) बॉली...

राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ और उनकी घातक मानसिकता

सही और गलत, उचित और अनुचित , मानवता या स्वार्थ के ताने बाने में फँसा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक बेहद दो-मुंह सर्प हो गया है। बल्कि मुझे तो संघ और उसकी संसथायों में दो-मुँहे तर...