ग़ुलामी और दासता में क्या अंतर है? पूर्वी संस्कृति में स्वतंत्रता के अभिप्राय क्या है?
ऑफिस के कंपाउंड में एक खुल्ली जगह पर एक कैंटीन हैं। कैंटीन वाले ने अंदर ही एक बड़े से पिंजड़े में दो तोते पाले हुए हैं। वो रोज़ दोपहर में पिंजरे को एक-दो घंटे के लिए खोल देता है। तोते बाहर आते हैं, उड़ कर इधर उधर पेड़ो की डालियों पर बैठते हैं। शायद थोड़ा मटरगश्ती करते है। फिर कैन्टीनवाला एक छड़ से उनको थोड़ा परेशान करता है, या शायद इशारा करता है। दोनों ही तोते थोड़े समय मे खुद ही उड़ते हुए आ कर पिंजरे में बैठ जाते हैं, और फिर पिंजरे का दरवाजा बंद कर दिया जाता है। फिर बगल में 10-12 कबूतरों वाला पिंजरा है। उनके साथ भी यही सिलसिला दोहरता है। अब दोनों ही पक्षियों के संग यह पूरा सिलसिला प्रतिदिन कई सालों से होता आ रहा है। कहने का मतलब है कि जो लोग यह सोचते हैं कि पंक्षी का निवास आज़ादी से खुल्ले आकाश में उड़ना है, तो वो लोग शायद गलत है। अगर आराम से रोज़ाना भोजन यूँ ही आसानी से मिलता रहे, और संग में रहने को सुरक्षित छत्र-छाया, और फिर थोड़ी-सी एक-आध घंटों की आज़ादी, तो फिर यह तथाकतीत ग़ुलामी तो पंक्षियों को भी खराब नहीं लगती हैं। बड़ी बात सोचने वाली यह है कि ग़ुलामी और पालतू बनाये जाने में ...