Posts

Showing posts with the label logic

छोटे बालको को कंप्यूटर का इतिहास पढ़ाया जाना क्यों जरूरी होता है ?

कंप्यूटर का इतिहास जानना क्यों आवश्यक होता है?  कभी आप एक प्रयोग करके देखिए :– छोटे बच्चों (करीब दस से बारह साल आयु वाले) से पूछिए कि,  'coding क्या होती है?' और फिर इन बच्चों से बारी बारी से जो कुछ भी जवाब मिलता है, उसको इकात्रण करिए। उनको थोड़ी देर के लिए आपस में कुछ बहस करने के लिए छोड़ दीजिए कि वे एक दूसरे के विरुद्ध खुद के जवाब को सही साबित करने की कोशिश करें; एक दूसरे के जवाबों का माखौल उड़ाए; एक दूसरे से अधिक श्रेष्ठ, बुद्धिमान पुरुष होने की कोशिश करें।  आप बस बैठ कर आनंद लीजिए, और उनके प्रयासों का खाका बनाते रहिए।  अगर अग्नि शांत होती दिखाई पड़े, तो वापस कुछ नया घी डाल दीजिए, कोई नया सवाल पूछ कर, जैसे कि, ' कंप्यूटर क्या होता है?'  उनके जवाबों में से ही कोई नया टांग खींचने वाला सवाल निकल लीजिए, जो उनको कुछ सोचने पर मजबूर करता रहे कि आखिर सही जवाब क्या हो सकता है।  आप एक बात गौर कर पाएंगे, शायद – कि, कितना जटिल काम होता है बच्चों को ये समझा सकना कि computer क्या होता है, क्या नहीं ; कंप्यूटर के प्रयोग से क्या क्या काम हो सकता है, और क्या क्या नहीं। ...

ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये?

ब्राह्मणवाद क्या है? इसको कैसे समझा जाये? महान यूनानी दार्शनिक और चिंतक, एरिस्टोटल , जिनके पास अपने समय के समाज वालों के बहुत सारे सवालों और प्रकृति के रहस्यों का जवाब था , वे अक्सर लोगों के सवालों के जवाब देते-देते  विवादों और शास्त्रार्थों में दूसरो के साथ उलझ जाया करते थे। इस भीषण बौद्धिक द्वन्द के दौरान वे अपने जवाब को उचित सिद्ध करने की चेष्ट करते थे, और कई कई बार वे सिद्ध भी हो जाया करते थे। इसलिये उनके समाज के मान्य लोगों में उनका बहुत सम्मान हुआ करता था। अपने समर्थकों से प्ररित हो कर एरिस्टोटल ने ही ऐसे उपवन तथा वाटिकाओं को आरम्भ किया था जहां वे अपने शिष्यों के संग विचरण करते हुए समाज के सवालों का और प्रकृति के रहस्यों पर विमर्श करते हुए उनके गुत्थीयों को तलाशते थे। एरिस्टोटल के वे उपवन तथा वाटिका ही अकादमी कहलाने लगे जहां तत्कालीन यूनानी समाज के समृद्ध और उच्च कोटि वर्ण के लोग अपने बालको को एरिस्टोटल के पास भेजा करते थे विमर्श करते करते अपनी बौद्धिक कौशल को प्रवीण करने के लिए। वह अकादमी (academy ) भविष्य में जा कर ये आधुनिक कालीन पाठशालाओं की नींव बनी।  मगर एरिस्ट...

Expert - To be or not to be

Indian Evidence Act अपने कुछ अनुच्छेद में Expert Witness की बात करता है। मगर यह कानून कहीं पर भी Expert Witness की मापक परिभाषा, quantified definition, नही देता है। तो यानी , जिक्र तो करता है, मगर परिभाषित नही करता है की किस मापदंड से तय होगा की किस विषय में expert witness किसे माना जाएगा। यहाँ पर 'कोर्ट' (यानी की जज महोदय) स्वतंत्र हो जाते है कि वह किसी भी अमुक व्यक्ति के विवरणी यानी CV के अनुसार उसे Expert Witness का ओहदा दे कर court का निर्णय कर दें उसके दिये गए ज्ञान के मद्देनज़र । सोचने वाली बात है की जब कानून खुद ही expert witness की मापन परिभाषा नही देता है तो आम व्यक्ति को इसका क्या अभिप्राय समझना चाहिए - कि, वह अपने आप को ज्यादा होनहार, ज्यादा Ultracrepidarian बनने से बचना चाहिए, या कि जब कोई मापन परिभाषा है ही नही तो फिर प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता है वह विषयों में अभिरुचि लेकर स्वयं को Expert Witness के लिए उपयुक्त सिद्ध कर सके। मेरी स्मृति में इस विषय पर एक अंग्रेज़ी फिल्म My Cousin Vinny अक्सर आती रहती है। फिल्म में एक वकील किसी एक आपराधिक मामले में अपनी...