निबन्ध क्यों लिखे जाते हैं ?

निबन्ध क्यों लिखे जाते हैं ? 

 मुझे गहरा यकीन है की कम से कम 90% हम भारतीय तो यही समझते हैं की निबन्ध-लेखन का मकसद किसी परीक्षा , जैसे लोक सेवा आयोग , या 12वी के ISC Board में छात्रों की अंग्रेजी भाषा में कुशलता नापने का होता हैं |
     निबन्ध और ब्लॉग लेखन में काफी अंतर होता है ।
 एक वेबसाईट (http://owl.english.purdue.edu/owl/resource/685/01/) से प्राप्त इस प्रश्न का उत्तर की 'निबन्ध-लेखन का सही प्रयोजन क्या होना चाहिए' कुछ इस प्रकार है :-
         अंग्रेजी भाषा में निबन्ध के लिए शब्द 'Essay ' को अधिकाँशतः लोग ये समझते है की एक प्रकार की लेखन-क्रिया को Essay कहा जाता है | मगर अंग्रेजी के शब्द Essay का मूल शब्द जो की फ्रेंच भाषा के प्रभावों से आता है , Essay-लेखन के सही प्रयोजनों की समझने में मदद-गार होगा । फ्रेंच भाषा में भी इसका मूल शब्द लेटिन भाषा से आता है जो की exigere है | इस शब्द का अर्थ होता है " जांच करना , परीक्षण करना , या सीधे शाब्दिक मूल में 'अर्थ निकलना' । "
        तो इस प्रकार Essay शब्द के प्राचीन शब्द की खुदाई कर के दूंडने से जो पता चलता उसे कुछ ऐसे वरणित किया जा सकता है की "निबन्ध-लेखन का प्रयोजन होता है छात्रों की प्रेरित करना की वह किसी भी विषय पर अपने विचारों को लिख कर आम- विचारों से जांच कारवाएं , परीक्षण करे की उनके विचार सही , तर्संगत और आम-स्वीकृत हैं की नहीं | "
         ( ऐसे में जाहिर है की निबन्ध लेखन में विवादास्पद विचार का लेखन भी आते है , क्यों की तभी उनका मुआयना होगा | निबंध-लेखन के अर्थ में 'विवादों से दूर रहे' का प्रयोजन निबन्ध-लेखन की भावनाओं के विपरीत है । हालाँकि , परीक्षा के तर्क से छात्रों को हमेशा यही सिखाया जाता है की निबन्ध- लेखन के दौरान विवादास्पद विचारों से दूर रहे क्योंकि आपके परीक्षक के विचारों से टकराव की अवस्था में आपके अंक कट जाने का भय होगा | )
         निबन्ध के अर्थ में लेखन में छोटे प्रभावशाली लेखों को कहा जाता हैं , जिसके दौरान छात्रों से कुछ अध्ययन से सम्बंधित ख़ास कौशलों को तीव्र (सान देने ) करने की अपेक्षा करी जाती है , जैसे की बारीकी से लेखअंशों को पढना और अर्थ गृहीत करना (Close reading ), विश्लेषण करना (analysis), तुलना करना और विषमता दूदना (समानताएं और विषमताएं, Comparison and Contrast ), शंकाओं का निवारण करना (persuasion ), संक्षिप्त होना (Concise -ness ), विचारों की स्पष्टता (Clarity ), और एक प्रस्ताव (कभी-कभी जोखिम भरा हुआ भी) सभी के विचारों के लिए रखना (Exposition) |
        ऊपर लिखे व्यक्तव्य से यह तो प्रमाणित होने ही लगेगा की निबन्ध-लेखन से छात्रों में किन-किन खासियतों का विकास होना चाहिए जब कोई छात्र वाकई में निबन्ध-लेखन में प्रवीण होने का प्रयास करेगा |
        निबन्ध लेखन का उद्देश्य होता है छात्र को प्रेरित करना की वह अपने खुद के विचारों की टटोले और विकसित करे- उन विचारों की लेखन की क्रिया के दौरान, और उनको आस-पास के अन्य विचारों से जोड़े और दिशा दे , (यहाँ हमे निबन्ध-लेखन को किसी शोध-पत्र लेखन के ठीक विपरीत अर्थ में देखना चाहिए जिसमे की छात्र केवल शोध किये गए व्यक्तव्य ही लिखता है , अपने खुद के विचार नहीं | ) तो इस प्रकार निबन्ध-लेखन अपनी खुद की प्रकृति से ही छोटे , संक्षिप्त , स्पष्ट, और दिशा-संगत होना ही चाहिए | निबन्ध-लेखन में छात्र ज़रा सा भी अपने विचारों की रेलगाड़ी (train of thoughts) को भटकने का जोखिम नहीं ले सकता है , और दिशा-हीन नहीं करा सकता है , यानि मुद्दे से जुदा नहीं हो सकता है। निबन्ध-लेखन में लेखन को पहले से सोच-विचार कर के , रूचि-पोषित शैली में ही लिखा जाता है |

Comments

Popular posts from this blog

the Dualism world

It's not "anarchy" as they say, it is a new order of Hierarchy

Semantics and the mental aptitude in the matters of law