ब्राह्मणी शास्त्रार्थ कला में sophistry का प्रयोग

भक्त लोग मोदी जी और भाजपा की जीत को मोदी जी के क़ाबिल नेतृत्व साबित करने में लगे रहते है।।भक्त ज़ाहिर है कि evm को नही मानते हैं, और साजिशन विपक्ष को evm के प्रति शिथिल करने के लिए भाजपा की प्रचंड जीत को मोदी के काबिल नेतृत्व, विपक्ष की नाक़ाबिल नेताओं के सहारे justify करते हैं।

यह एक चिरपरिचित तरीका है। आप खुद से देखेंगे कि कश्मीर से धारा 370 को हटाने के संग ही  भक्त वर्ग और उनके टीवी चैनल यही साबित करने लगे हैं कि कश्मीर लोग खुश हैं, बल्कि वह लोग मोदी जी का धन्यवाद कर रहे हैं।

अब ट्रीपल तलाक़ में भी देखिए। भक्त लगातर यही साबित करने के दावे दे रहे हैं कि मुस्लिम महिलाएं खुश हैं।
Demonetisation को याद करें। भक्त लगातार दावे कर रहे हैं थे कि आतंकवाद की रीढ़ टूट गयी है, काला धन खत्म हो गया है।

पिछले युग मे जब ब्राह्मणों ने तंत्र पर काबिज़ हो कर बढ़त बनाई थी, तब भी यही दावा किया था कि पिछड़े और दलित वह वर्ग है जिनके यहाँ पढ़ाई-लिखाई कर सकने के दिमाग़ ही नही होता है। और बाद में जब आरक्षण नीति के माध्यम से दलित -पिछड़ा तन्त्र में आ बैठे और अपने को काबिल साबित करने लगे, तब ब्राह्मणों ने बात की लय बदल दी और कहने लगे कि आर्थिक आधार पर हमे भी आरक्षण दो !

सबक यह है कि ब्राह्मणों के संग किसी भी विमर्श या वादविवाद के दौरान न सिर्फ शब्दों को सुनों, बल्कि उनकी बात की लय को भी पकड़े रहें, क्योंकि वह लय को बड़े चुपके से बदल कर तर्कों के संग छल कर देते हैं और आपको अपने तर्कों से गुमराह कर देते हैं।

ब्राह्मणों की तर्कशक्ति की सबसे बड़ी खूबी यही है-- कि, वह अपने विरोधी पक्ष - दलित और पिछड़ा- को पता भी नही लगने देती है कि कब उन्होंने तर्क प्रवाह की लय को बदल दिया है शब्दों को करीब करीब पहले जैसा ही रखते हुए, और फिर उनके विरुद्ध यह कह दावा ठोक दिया  "आप को बात नही समझ आ रही है, क्योंकि आप अल्प-बुद्धि हैं "। यह सारा तरीका ब्राह्मणी शास्त्रार्थ कला का चिर-परिचित क्षय-मात है। इसे अंग्रेज़ी में sophistry बुलाया जाता है, जो कि देखने-सुनने में एकदम debate के जैसा ही होता है।

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