व्यंग अक्सर करके तुकों को उल्टा कर देते हैं।

व्यंग अक्सर करके तुकों को उल्टा कर देते हैं।
व्यंग सुनाई पड़ने में हास्य रस से भरपूर होते हैं, और इसलिये चिंतनशील मस्तिष्क को बंधित कर देते हैं समालोचनात्मक विचारों को शोध करने में।
इसलिये व्यंग हास्य में ही अक्सर उल्टी-बुद्धि , या अंधेर नगरी आदर्शों को प्रचारित किया जाता है। अगर लोग गंभीर अवस्था में होंगे तो ग़लत बात को तुरंत अस्वीकार कर देंगे। तो फ़िर उनको उल्टी बुद्धि का ज़हर कैसे बचा जा सकता है ?
 उत्तर है - व्यंग हास्य की चाशनी में डुबो कर !

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