नेतृत्व - भावुकता पूर्ण और आत्म-पूजन व्यक्तिव विकार पूर्ण
नेतृत्व करने में भावुकता का बहोत महत्व होता है / मुंशी प्रेम चंद की लिखी एक कहानी, "परीक्षा" , में यह व्यक्तव्य समझ में आता है की जनता का सच्चा सेवक वही होता है जो की जनता की भावनाओ और दुःख-दर्द को समझता है / इसके विपरीत एक दूसरी कहानी, "ममता", में यह दिखाया गया है की कैसे एक गंगन-चुम्बी मंदिर बनवाने के बावजूद ममता नाम की वृद्ध , जिसने बादशाह को शरण दे कर उसकी जान बचाई थी, उसका मंदिर के तखते पर कहीं नाम न था / बड़े लोग गरीबों के लिए भी अगर कुछ करते हैं तो मकसद अपना नाम बड़ा करना का होता है / मगर यथार्थ की त्रासदी को तो समझिये और मुस्करिये की भावुकता का असल नेतृत्व में कहीं स्थान नहीं है / ऐसा नहीं है की समूचे विश्व में यही हालत है/ मगर भारतीय पटल का सत्य यही है/ नतृत्व में एक और दूसरे किस्म की शाख्न्सियत भी बहोत तेज होती है अपना स्थान दूढ़ने में / यह 'आत्म-पूजन व्यक्तिवा विकार' से ग्रस्त व्यक्ति नतृत्व में स्वयं की अर्चना की गुंजाइश का पहचानता है / यह व्यक्तिव भावनाओ से विमुख होता है / यह नेतृत्व में ताकत का प्रवाह करता है, बेइम्तिहाँ, कुचल देने व...