प्रजातंत्र में तानाशाही के क़ाबिज़ होने के गुप्त रास्ते - न्यायपालिका में सेंध

तानाशाही की यही पहचान होती है। प्रजातन्त्र में तानाशाही ऐसे ही क़ाबिज़ होती है। कि, पहले तो न्यायपालिका में अपने आदमियों को पदुन्नति दे कर जज और शीर्ष पदों तक पहुंचाती है। फिर उनके माध्यम से न्याय को ही पक्षपाती बना देती है। जिन अपराधों के मुक्कदमों में अपने आदमियों को रिहा कर दिया जाता है - कभी सबूतों की कमी का बहाना लगा कर, कभी निर्दोष दिखा कर, कभी जांच की कमियां दिखा कर-- वहीं पर अपने राजनैतिक विरोधोयों के हल्के हल्के मुक़द्दमों को भी "गंभीर" बता कर जेल भेज दिया जाता है। इससे विरोधी जनता के बीच नेता प्रतिपक्ष की कमी हो जाती है, और विरोधी जनता का मनोबल भी टूटने लगता है। फिर तानाशाही पार्टी को और ज्यादा छूट मिल जाती है अपनी मनमर्ज़ी करने की।

द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व जर्मनी में एडोल्फ हिटलर ने में ऐसे ही सत्ता में अपने विरोधयों को साफ़ किया था। इटली में मुससोलिनी और जापान में भी इसी तरह राजनैतिक विरोधियों को रास्ते से हटा कर तानाशाही आयी थी और फिर देश को महाविनाशकारी विश्वयुद्ध में झोंक दिया था।

Comments

Popular posts from this blog

The problem with India Against Corruption (www.indiaagainstcorruption.org)

Semantics and the mental aptitude in the matters of law

the Dualism world