EVM मामला और सरकार का रवैया
सरकार ने बहोत ही बचकाना सा कारण बताया है न्यायलय में कई evm के साथ vvpat को क्यों नही अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
सरकारी वकील ने तर्क दिया है कि चूंकि evm कभी भी छेड़छाड़ कारी साबित नही करि जा सकी है, इसलिए वह छेड़छाड़ मुक्त ही मानी जानी चाहिए। और 2013 के जिस फैसले में vvpat की बात हुई थी, उसमे भी यही बात रखी गयी थी कि evm छेड़छाड़ विमुक्त है, और vvpat मात्र एक अतिरिक्त उपाय ही है। तो इस तर्क पर vvpat की अनिवार्यता को निरस्त करना चाहिए, ताकि इसके उपयोग से आने वाला खर्च कम किया जा सके।
Evm छेड़छाड़ विमुक्त है, यह अपने आप मे एक असिद्ध वाक्य है। evm की छेड़छाड़ विमुक्ति सिद्ध करने वाला परीक्षण तो इस देश मे कभी हुआ ही नही है। evm hacking नाम से जो कुछ भी कार्यक्रम किये गए है वह तो डेमोंस्ट्रेशन करके करे गए हैं। जब जब evm हैकिंग के लिए नागरिक संघटनों और कुछ एक चुनावी पार्टी (जैसे कि आम आदमी पार्टी) ने चैलेंज दिया है, निर्वाचन आयोग ने चैलेंज की शर्तों के चक्रव्यूह के बीच मे evm को रख कर उनके परीक्षण को रोक दिया है।
जिन शर्तो के चक्रव्यूह में निर्वाचन आयोग अपनी evm को बचा रहा है, उन शर्तों के तहत किसी भी मशीन को छेड़छाड़ विमुक्त साबित आसानी से किया जा सकता है। बल्कि दिल्ली विधान सभा मे प्रदर्शित करि गयी demo evm को भी आसानी से छेड़छाड़ विमुक्त घोषित करा जा सकता है जबकि यह सर्वव्यापी है जी वह मशीन तो छेड़छाड़ साबित करने के लिए बनाई गई है।
तो फिर न्यायलय में भ्रमकारी तर्क को प्रस्तुत किया गया है कि evm कभी भी छेड़छाड़ कारी साबित नही हुई है। असल मे तो इसका व्यापक और सार्वजनिक परीक्षण कभी भी हुआ ही नही है। बल्कि चुनावों की पवित्रता बनाये रखने के लिए एक और प्रमाण निर्वाचन आयोग को देना होगा, की उसकी सभी हर-एक मशीन भी छेड़छाड़ विमुक्त है प्रतिपल। क्योंकि औसतो के सिद्धांत से अगर कुछ प्रतिशत मशीन भी छेड़छाड़ करि गयी है तो उतना भी काफी हो सकता है चुनावी नतीज़ों को अवैधानिक तरीको से किसी एक पार्टी के पक्ष में करने के लिए।
सरकारी वकील ने यह भी बोला है कि नागरिकों को कोई अधिकार नही है यह तय करने का की वोट डालने की प्रक्रिया कैसी होनी चाहिए।
यह अर्धसत्य वाक्य है। हो सकता है कि तमान तरीको में किसी एक विशेष तरीके का चुनाव नागरिकों के अधिकार के लिए अभी तक आवश्यक न हो, मगर यह हमेशा से नागरिकों का हक़ है की जो भी व्यवस्था हो वोटिंग की, उनको प्रमाण मिलना चाहिए कि उनका वोट उसी के खातों में पहुचा है जिसको देने की मंशा उनकी थी।।नागरिकों का यह भी हक़ है जी निर्वाचन प्रक्रिया, वोटिंग की गिनती इत्यदि में कोई भी अवैधानिक तरीके के उपयोग की संभावना मात्र पर उनकी शंकाओं का तुरंत निवारण किया जाए और कदम लिए जाए। evm की छेड़छाड़ की एक संभावना तो आम आदमी पार्टी की demo machine ने दिल्ली विधानसभा में सभी के सामने प्रस्तुत पहले ही करि है , जिस एक संभावना का निर्वाचन आयोग का आज तक कोई समाधान दिया ही नही है। बल्कि इस कार्यवाही से बचने के लिए गोल गोल घूम रहे हैं। नागरिक संघटनों और कुछ पार्टीयों ने पहले ही कहा है कि असल प्रमाण तो evm की चिप के सार्वजनिक परीक्षण से ही किया जा सकता है। यह वह काम है जो कि निर्वाचन आयोग करने को तैयार नही है।
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