शब्द जनित भ्रम से पैदा हुआ बौद्धिक दिवालियापन

Anarchy शब्द का वास्तविक और संतुलित अर्थों में प्रयोग आज भाजपा और नरेंद्र मोदी की दिल्ली में करी जा रही हरकतों के लिए होना चाहिए था।
    मीडिया , यानि बिकाऊ समाचार सूचना व्यापर, ने भारत की जनता को भाषा और शब्दावली के संतुलित ज्ञान और सम्बद्ध अर्थ , अभिप्रायों के उपयोग में अयोग्य , मूर्ख बुद्धि बना दिया है।
   anarchy शब्द केजरीवाल के धरनाओं और विरोध प्रदर्शन के लिए किया गया था, जबकि वह संवैधानिक ढांचे से नागरिक अधिकार होता है,
  जबकि सही मायनों में आज नरेंद्र मोदी दिल्ली के राज्यपाल के माध्यम से जो कर रहा है वह असंवैधानिक और anarchy है।