न्यू यॉर्क टाइम्स लेख का हिंदी अनुवाद- भावनात्मक उत्तेजना से अनुवाद और उच्चारण में उत्पन्न भ्रम की घटना

प्रभावशाली अमेरिकी समाचारपत्र 'न्यू यॉर्क टाइम्स' द्वारा 8 अक्टूबर को प्रकाशित किये गए एक लेख जिसका शीर्ष था "भारतीय छात्रों के लिए एक असत्यवान शिक्षा पाठ्यक्रम" (False teachings for Indian students) का भाजपा समर्थकों ने हिंदी अनुवाद के दौरान अर्थ-का-अनर्थ कर डाला है। भाजपा समर्थकों के अनुवाद को पढ़ कर सोशल मीडिया (वह्ट्स अप्प इत्यादि) पर प्रचलित एक लघु-हास स्मरण आता है जिसमे लालू प्रसाद जी को माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक बिल गेट्स द्वारा नौकरी के लिए अस्वीकृती पत्राचार जाता है। मगर अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में लालू जी पूरा अर्थ का अनर्थ करके उस पत्र को अपने सम्मान में प्रतिष्ठी पत्र उच्चारण में पढ़ डालते हैं।

   कभी कभी मुझे लगता है की भारतियों की एक पीड़ी इसी अंग्रेजी-से-हिंदी अनुवाद में ही मानसिक रूप से कमज़ोर कर दी गयी है। भाषा सम्बंधित सक्षमता मानसिक विकास का सबसे महतवपूर्ण पहलू है। मगर अंग्रेजी बोलने और सिखाने के सामाजिक प्रतिष्ठा चलन में हम भारतीय अपने नन्हे मुन्ने बच्चों से एक भावनाहीन अंग्रेजी में बातचीत करके उनमे भाषा-संग -भावना का सम्पूर्ण विकास होने में अवरोध कर दे रहे हैं।
   प्रत्येक भाषा में पर्यायवाची शब्दों में से उपयोग के लिए चुना शब्द वाचक की भावना और अर्थ को प्रदर्शित करता है। मगर जब बच्चों में भाषा-और-भावना का बौधिक ज्ञान ही विक्सित नहीं होगा तब ऐसे ही अर्थ के अनर्थ होते रहेंगे। और फिर किसी एक देश की बड़ी आबादी मुर्ख हो जाएगी -अपने मानसिक विकास में। यहाँ हमें भाषा में दिए गए सुझाव के शब्द एक आदेश सुनाई पड़ेंगे, सचेत करने के प्रयास में प्रयोग शब्द हमें एक प्रेरणा सुनाई देंगे , और घटना का तथ्यिक वर्णन के लेख हमे घटना के सम्मान में लिखे शब्द सुनाई देंगे। इस विकास-अवरोधित पीडी के व्यक्ति शायद कुछ प्रथम क्ष्रेणी प्रत्यय (trivia) और चतुर्थ श्रेणी प्रत्यय (quadrivia) के कुछ भी अर्थ नहीं निकाल पाएंगे। इस पीडी के व्यक्तियों के लिए ट्रिविया और क्वाद्रिविया मात्र 'मज़े के लिए बोली गयी फिजूल की बात' हो जायेंगे।
     भाषा अनुवाद के मध्य में पैदा हुआ भ्रम हमारे अंतःकरण पर प्रभाव छोड़ेगा और हमारे अंतःकरण को निष्पक्षता और निर्मोह से न्याय करने में अपांग बना देगा।
   
   भाजपा के समर्थको ने न्यू यॉर्क टाइम्स के लेख को अमेरिका के 'वैमनस्य से जनित भय' (prejudiced fear, jealousy, envy) के रूप में उच्चारित करा है, जबकि लेख 'चेतावनी की भाषा शैली'(Caution, fore warning) में है और तकनिकी सिद्धांतों (technically sound reasons) के आधार अपना विचार प्रस्तुत कर रहा है। एक आम भारतीय नागरिक भाजपा के उच्चारण को पढ़ कर अमेरिका से आक्रोशित महसूस करेगा कि अमेरिका उसके देश के साथ नाइंसाफी कर रहा है , उसके देश के गौरवशाली इतिहास को मान्यता नहीं दे रहा है, इतिहास को मिथक कथा मान रहा हैं। आम नागरिक भाजपा के करनियाँ, जिसकी चेतावनी इस लेख में दी गयी है, से गौरान्वित महसूस करेगा कि सिर्फ भाजपा ही उसके देश और गौरवशाली इतिहास को दुबारा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही है।

बरहाल, न्यू यॉर्क टाइम्स के लेख false education for Indian Students के उचित हिंदी अनुवाद का मेरा एक प्रयास में यहाँ नीचे लिख है :-

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