अपशब्द क्या हैं, और उनका भाषा विज्ञानं की दृष्टि से क्या योगदान होता है ? Part 2

अपशब्दों से ही मिलती जुलती क्ष्रेणी दो अन्य व्यक्तव्य भी है - अपमान-जनक (insulting ) शब्द, और आपत्ति-जनक (objectionable ) शब्द ।
  अपमानजनक शब्द सीधे-सीधे मनोविज्ञान से सम्बन्ध रखते हैं । यह सत्ता-प्रतिद्वन्द से प्रेरित होते है । इन्हें Disparaging शब्द भी कहा जाता है । इनके उदाहरण है - "तुम कभी भी कोई काम ठीक से नहीं करते । " (तर्क संगत दृष्टि में ऐसा कोई मानव है ही नहीं जिसने सब कुछ गलत किया हो । स्पष्ट रूप से इन वाक्यों में किसी की एक गलती पर उसे जीवन परयान्त गलती करने का इलज़ाम दे दिया गया है । ) भाषा के कुछ स्वरुप तो मूल से ही व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक सत्ता को चुनौती देते हुए बने है । जैसे "क्या बे , तू क्या कर रहा है ।" कुछ उपभाषाओँ में तो ये सांस्कृतिक है की साधारण वार्तालाप में वह चुनौती पूर्ण शब्दों का प्रयोग करते है । इन उपभाषाओं में सम्मान के शब्द कमजोरी और आत्मविश्वास की कमी का प्रदर्शन माने जाते हैं ।
    अपमान जनक शब्द मूलतः तो कोई अपराध नहीं है , मगर किसी घटना अथवा अपराध में इनके योगदान पर कार्यवाई होती है । अपमानजनक शब्दों के प्रभाव में आपसी रिश्ते का असर नाकारा नहीं जाता है । फिर यदि कोई घटना घाट जाये तब अपमानजनक शब्दों को प्रयोग करने वाले व्यक्ति को भी अभियुक्त माना जाता है की उसने एक 'टीम' के निर्माण में बाधा पहुचाई ।
    अपमानजनक अथवा आपत्ति-जनक शब्दों का मिला जुला उदाहरण में कुछ वाक्य नीचे दिए है -
              "किस्से पूछ कर तुमने यह काम किया ?", (क्या व्यक्ति स्वयं से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं होता )
              "तुम कौन होते हो खुद से यह करने वाले । " (क्या व्यक्ति किसी का दास है )
                " तुमसे किसने कहा था यह करने को । " (व्यक्ति क्या हर कार्य किसी के आदेश पर करने के लिए ही बना है )
  इन वाक्यों में व्यक्ति को दास , गुलाम होने का अपमान किया जाता है । साथ ही, आपत्ति पूर्ण प्रशन है जिनकी आपत्ति कोष्टकों में लिखी हुई है ।

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