सिगमंड फ्रायड का छाता को खोलने वाला एक्सपेरिमेंट

Psychology (साइकोलॉजी) यानी मनोविज्ञान के जनक कहे जाने वाले जर्मनी के पडोसी देश ऑस्ट्रिया में जन्मे, विख्यात वैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने 1938 (के करीब) एक एक्सपेरिमेंट किया था, जिससे उन्होंने इंसान की बुद्धि में "चेतन मन "और "अचेत मन" के अस्तित्व की पुष्टि करी थी।

हुआ यूं कि फ्रायड के जान–पहचान के एक डॉक्टर ने अपने कुछ मरीजों का इलाज करते समय सम्मोहन क्रिया (Hypnosis) करके आदेश दिया कि जब मैं तुम्हें अपने सम्मोहन से मुक्त करने के बाद वापस कमरे में प्रवेश करूंगा, तब तुम एक छाता खोल कर मेरे सर पर छतरी से ढक कर मेरा स्वागत करोगे। 

और इसके बाद डॉक्टर वैसा करते हुए, व्यक्ति को सम्मोहन से आजाद करके ,पुनः कमरे में प्रेवश करता। व्यक्ति, अनजाने में, छाता खोल लेता और डॉक्टर के शीश को छतरी से ढकते हुए उनका स्वागत करने लगता। 
और बाद में जब व्यक्ति से पूछताछ करी जाती कि उसने ऐसा क्यों किया, तब अलग–अलग व्यक्ति अलग–अलग "वजह" बताने लग जाते। जैसे, एक व्यक्ति ने कहा वो सिर्फ छाते का परीक्षण कर रहा था कि छाता कोई मरम्मत तो नही मांगता है। एक व्यक्ति ने कहा की कमरे की छत कभी कभी टपकती है, इसलिए उसने डॉक्टर को बचाने के लिए ढका था। एक ने कहा कि वो सभी डॉक्टरों का ऐसे स्वागत करता है।

जबकि गहन सत्य डॉक्टर को पता ही था कि सम्मोहन के समय के आदेश को ये सभी इंसान मुक्त होने के बाद भी निभा रहे हैं। फ्रायड ये सब होते देख रहे थे।

यहां से फ्रायड ने विचार दुनिया को प्रस्तावित किया कि इंसान की बुद्धि सम्मोहन के समय दूसरे अंश से चलने लगती है, और होशोहवास में किसी दूसरे अंश से। मगर दोनो अंश में जोड़ भी होता है। यानी, होशोहवास में किए गए काम भी अक्सर किसी पुरानी बेहोशी में मिले आदेश का पालन करने में अपने आप कर बैठता है इंसान। और फ़िर इंसान झूठमूठ के 'वजह' भी खुद से गढ़ लेता है, अपने कर्मों को सही साबित करने की कोशिश में। यानी इंसान कभी-कभी होशहवास में भी बेखूद हो सकता है!! और जिसे बाद में वह सही साबित करने लगता है , मानो जैसे उसने सोच-समझ कर किया था वो काम। !!

फ्रायड ने स्पष्ट शब्दों में प्रस्तावित कर दिया – conscious mind(चेतन मन)और unconscious mind(अचेत मन) के अस्तित्व का। और 'वजहों' के माध्यम से इन दोनो अवस्थाओं को पकड़ लेने को एक गलत तरीका बता दिया कि , किसी इंसान के मात्र वजह बता देने से यह तय नहीं किया जा सकता है कि उसने वो काम consciously किया है, या unconsciously

इस प्रकार के प्रयोगों से सिगमंड फ्रायड ने मनोविज्ञान क्षेत्र की नींव डाली थी।

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