क्या राजनैतिक झगड़ा चल रहा है वर्तमान भारत में 'इतिहास' और 'हिन्दू राष्ट्र' के इर्दगिर्द

मेरा खयाल है कि हमें बारबार इतिहास कि ओर इसलिए भी देखना पड़ जाता है क्योंकि हमारी वर्तमान काल की कई सारी समस्याओं के मूल को समझने की दिक्कत हमें इतिहास में ले जा बैठती है। 

करीबन हमेशा ही, हमारी वर्तमानकालीन समस्याओं का मूल हमारी अपनी सोच, तर्क, दर्शन, नही है। बल्कि कहीं से आयात हो कर आई है। उस आयात क्रिया का एकशब्द, संक्षिप्त विवरण है 'इतिहास'। इसलिए भारत के विधान, सामाजिक,धार्मिक, राजनैतिक, प्रशासनिक समस्याओं को बूझने के लिए 'इतिहास' जानना परम आवश्यक है। 

और फ़िर जब भी हम अपनी तफ्तीश के दौरान 'इतिहास' और वर्तमान चाहतों के बेमेले को  देखते हैं, हमें अपने से एहसास आ जाता है कि हमारा तंत्र नकल करके प्राप्त किया हुआ है, यानी हमारे अपने दर्शन की उपज नहीं है। 
इसके आगे, जब हम दोनो तर्कों को- हमारी अपनी सोच और दर्शन के तर्क, तथा आयात किए गए ‘इतिहासिक’ तर्क को देखते हैं– तब हमें प्रत्येक विचार में ‘आज़ादी’ (ब्रिटिश के लौट जाने की बाद वाली) के बाद हुई छेड़छाड़, pseudo-करण (छद्म करण) दिखाई पड़ने लगता है।

फिर, यहां से हमारे देशवासियों में दो गुटों में मत-विभाजन शुरू हो जाता है। यही दोनो गुट मत विभाजन हमारे देश की दो विपरीत राजनैतिक विचारधाराएं बन कर उभरती है · कांग्रेस पार्टी और आरएसएस पोषित भाजपा। 

एक मत (गुट) का मानना है कि आयात करी गई सोच से देश को चलाना उचित होगा। ये सोच अपना प्रतिनिधित्व करती है 'इतिहास' के सशक्त ज्ञान से, अपनी ‘इतिहासिक पृष्टभूमि’ से, भारत के वर्तमान, अंबेडकर-रचित संविधान से।

और दूसरा मत (गुट) है जो मानता है कि आयात करे गए विचारधारा, दर्शन, तर्क को विस्थापित करना होगा, उखाड़ फेंकना होगा। क्योंकि ये बारबार छद्मकरण को जन्म दे रहा है, और ऐसा इसलिए क्योंकि ये भारत के समाज का अपना 'मूल' नहीं है, बल्कि आयात किया हुआ है। ये सोच अपने अस्तित्व को छलकाती है– कमजोर तथ्यिक इतिहास के ज्ञान से, काल्पनिक इतिहास की रचना (fake history, fake narratives) से, प्रबल और अंधविश्वास भरे धार्मिक ज्ञान से, भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की चाहत से, हिंदू धर्म और हिंदू राष्ट्र को विश्व के सर्वश्रेष्ठ धर्म और राष्ट्र साबित करने की चाहत से। 

दिक्कत यूं बढ़ जाती है कि आयात हो कर आई, यानी ‘सत्य इतिहास’(true, certified history) ज्ञान वाली सोच को समर्थन भारत के बहुजन करते हैं, जो स्वयं को ‘मूलनिवासी’ मानते हैं। और काल्पनिक इतिहास (fake history, narratives), हिंदू राष्ट्र वाले मतधारा को उच्च जाति ब्राह्मण जातियां वगैरह समर्थन करती हैं, जो सुदूर अतीत में किन्ही अन्य देशों से आ कर भारत में बस्ती चली गई है, और उसी अतीत काल के समय में कुछ हालातों के चलते अपनी सुविधानुसार 'हिंदू धर्म' को परिवर्तित कर चुकी थी। इस परिवर्तित धर्म, संस्कृति को वे "हिन्दू धर्म ' बुलाती हैं। मगर वर्तमान काल के अधिकांश भारत वासी इन अतीत वाले तथ्यीक ज्ञान से अनभिज्ञ है, और वे ‘हिंदू धर्म विचार’ धारा से प्रभावित हैं, क्योंकि वे स्वयं को हिंदू मानते हैं। ये लोग अधिक गहरा दर्शन नही रखते हैं कि ‘हिंदू’ होने का क्या मतलब होता है, क्या होना चाहिए, इत्यादि। वे बस इतना समझते हैं कि अतीत काल में हमारे ऊपर आक्रमण हुआ था, और हमारी कुछ मूल जीवन शैली को तबाह किया गया था। आगे, उनके अनुसार ‘हमें’ या तो बदला लेना होगा, या वो वाली जीवन शैली दुबारा प्राप्त करनी होगी, हिंदू राष्ट्र बना कर। 

फिलहाल भारत में ऐसी सोच वाले लोग अधिक संख्या में हैं, बहुमत में। 

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी उन लोगो का प्रतिनिधित्व कर रही है जो स्वयं को मूलनिवासी तो मानते है, मगर अब वे खोई हुई, विलुप्त हो चुकी, अज्ञान,अनजान संस्कृति को वापस पाने को चाहत नहीं रखते हैं। वे लोग दर्ज़ किए गए तथ्यीक, और प्रमाणित इतिहास के ज्ञान में अव्वल लोग हैं, और इसके अनुसार देश को आगे ले जाना चाहते हैं - नए ,ताथ्यिक,प्रमाणित, सर्वसम्मत, इतिहास पर बसी नई संस्कृति के अनुसार। 

अब, इस लोगों के साथ ये दिक्कत है कि, क्योंकि नया इतिहास (उसका दर्शन, उसका तर्क) आयात हो कर आया है, इसलिए वे बारबार छद्म (pseudo, duplicate, fake) concepts में फंस जा रहे हैं। 

दूसरा वाली मतधारा इस fake ness, छद्मकरण से त्रस्त हो कर अपने वाले , पुराने concepts और ideas par लौटना चाहती है। मगर अपनी पुनर्वापसी यात्रा के पूर्ण सकने लिए वो fake history रचती है, और ऐसा करती हुई रंगे हाथों पकड़ी जा रही है।
  

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