Monday, May 01, 2017

अंतर्राष्ट्रीय कानून, प्राकृतिक नियम, और नास्तिकवाद

अन्तरराष्ट्रीय कानून क्या है ?

ब्रिटिश कॉमन लॉ क्या है ?

अंतर्राष्ट्रीय कानून एक विस्तृत खाका है इंसानी आदान प्रदान का जो की खुद प्राकृतिक नियमों पर रचा बुना है। यहाँ इंसानी आदान प्रदान का अभिप्राय है व्यापार से, विवादों को सुलझाने की पद्धतियों से, अपराध नियंत्रण की पद्धति से, और न्यायायिक पद्धति से।
अब चूँकि अंतर्राष्ट्रीय कानून की ही तरह ब्रिटिश कॉमन ला या यूरोपीय कॉमन लॉ भी प्राकृतिक नियमों पर रचा बुना हुआ है, इसलिए अक्सर करके अंतर्राष्ट्रीय कानून को यूरोपीय कॉमन लॉ की देन भी बुला दिया जाता है।

और यूरोपीय मान्यताओं में प्राकृतिक नियमों का रखवाला खुद प्रकृति है, कोई व्यक्ति नहीं , इसलिए अंतर्राष्ट्रीय कानून का रखवाला भी खुद प्रकृति ही है, कोई देश या व्यक्ति नहीं है।

अब यहाँ एक असमंजस है। वह यह कि, क्या ज़रूरी है की प्राकृतिक नियमों के प्रति यूरोपीय लोगों की जो मान्यताएं हैं, वही सही है, और आपकी नहीं ?

असल में प्राकृतिक नियम के प्रति किसी व्यक्ति की जानकारी उसकी आस्था का अंश बन जाती है।
तो शब्द तो एक ही रहता है - प्राकृतिक नियम - मगर इसके अभिप्राय अलग हो जाते हैं इस सवाल पर की आप अस्तिकवादि हैं, या फिर नास्तिकवादि हैं।

अस्तिकवादि लोगों और नास्तिकवादि लोगों के समझ में प्राकृतिक नियमों में क्या भेद है, अंतर है ?

सवाल का उत्तर जानने के लिए आपको थोडा सा दर्शनशास्त्र में जाना पड़ेगा ।

नास्तिकवाद में संसार का सञ्चालन कुछ विस्तृत शक्ति के नियमों से हो रहा है, जिन शक्तियों और उनसे सम्बंधित नियमों का ज्ञान कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है - वैज्ञानिक खोज, अनुसन्धान, अन्वेषण, भ्रमण , इत्यादि के द्वारा। तो आस्तिकवाद में प्राकृतिक नियम का ज्ञान प्राप्त करने के लिए इंसान का जन्म खाता - जैसे उसका धर्म, उसका वर्ण, उसके संस्कार, उसके जन्म समुदाय की ईश्वर से सम्बन्ध और नज़दीकी इत्यादि महत्वपूर्ण नहीं हैं।

मगर अस्तिकवादि विचारों में प्राकृतिक नियम के अर्थ में प्रकृति खुद से किसी सर्वशक्तिशाली ईश्वर की मनमर्ज़ी है। चूँकि 'ईश्वर कौन है' का खाका इंसान के जन्म खाके के अनुसार बदलता रहता है, इसलिये प्राकृतिक नियम किसी लिखने वाले की मनमर्ज़ी माने गए है, जिन्हें हम प्राकृतिक नियम के लिखने वाले को ही बदल कर के प्राकृतिक नियमों को भी बदल सकते हैं !!!

प्राकृतिक नियमों के प्रति आस्तिकवादि और नास्तिकवादि विचारों का अंतर समझा क्या आपने ?

नास्तिकवाद में प्राकृतिक नियम का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त करना होगा - न्यूटन , आइंस्टाइन , चाडविक इत्यादि को पढ़ना होगा।

जबकि आस्तिकवाद में विज्ञान खुद भी धार्मिक संस्कारों का एक उपभाग है। इसलिए प्राकृतिक नियमों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हमें धर्म संस्कार को पहले जानना होगा। और इसके लिए हमें धर्म जानने वाले व्यक्ति के पास जाना होगा- जो की धर्म संस्कार को इंसान के जन्मखाते , उसकी वर्ण,उसके वर्ग, इत्यादि के अनुसार बताएगा।
तो अस्तिकवादि विचार में अगर आप किन्ही प्राकृतिक नियमों का ज्ञान रखने का दावा करता हैं तब फिर हो सकता है की किसी शिक्षा पद्धति ने आपको किसी राजनैतिक साज़िश के तहत आपका ब्रेनवाश करके अपने अनुसार ढालना की षड्यंत्र किया है।
तो फिर, आस्तिकवाद में प्राकृतिक नियम के ज्ञान को शिक्षा पद्धति को बदल के बदलाव किया जा सकता है। प्राकृतिक नियम किसी ईश्वर की मनमर्ज़ी होते है, और जैसे ईश्वर इंसान की भूगौलिक स्थिति और पैदाइशी संस्कारो के अनुसार बदल जाया करते हैं, तो फिर प्राकृतिक नियम में बदलाव किया जा सकते है !!!

तो अस्तिकवादि विचारों में अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई न कोई रखवाला होता है। अगर कोई कहे की अंतर्राष्ट्रीय कानून यूरोपीय कॉमन ला या फिर ब्रिटिश कॉमन लॉ पर आधारित किया गया है, तो इसका अर्थ है की वही लोग इसके रखवाले हैं, क्योंकि वही लोग इसको लिखने वाले है।

जबकि नास्तिकवादि विचारों में अंतर्राष्ट्रीय कानून को लिखने वाला व्यक्ति भले ही कोई भी हो,इसका रखवाला खुद प्रकृति ही है। अगर अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन नहीं होगा तब फिर व्यापार कमज़ोर हो जायेगा, यानि आर्थिक दरिद्रता आएगी, आपसी विवाद को पूर्ण संतुष्टि से नहीं सुलझाया जा सकेगा जिससे की युद्ध और अशांति आएगी, हिंसा बढेगी,  जनजीवन अस्तव्यस्त होने लगेगा।

आस्तिकवादि विचारों में अंतर्राष्ट्रीय कानून खुद ही कारण है वैश्विक हिंसा, गरिबी , और जनजीवन अस्त व्यस्त होने का क्योंकि यह कानून लिखा गया है यूरोपीय लोगों के ईश्वरीय आस्था के अनुसार , दूसरे धर्मों के ईश्वर की आस्था के अनुसार नहीं।

आस्तिकवादि लोग कौन है ?
वह जो किसी भी धर्म को प्रबलता से मानते है। यानि वह जो secular नहीं है, राजनीती और प्रशासन नीति को धर्म का अंश मानते। बल्कि धर्म को खुद ही सच्चा और श्रेष्ठ राजनीति और प्रशासन नीति समझते है।

आपका secular होना या नहीं होना ही तय करेगा की आप अंतर्राष्ट्रीय कानून का कितना पालन करेंगे। और अन्तर्राष्ट्रीय कानून का पालन तय करेगा की आपका समाज कितना हिंसा मुक्त हो पाता है, व्यापार में समृद्ध हो पाता है।
और आप secular हैं या नहीं,यह तय होगा इससे कि आप आस्तिकवादि हैं, या नास्तिकवादि।।जाहिर है, आस्तिकवादि न तो secular होंगे, और न ही प्राकृतिक नियम को उस प्रसंग में समझते होंगे, जिस प्रसंग में इनको अंतर्राष्ट्रीय कानून का आधार बनाया गया है। और फिर अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन नहीं कर सकने पर आप का दुश्मन होगा अमेरिका और यूरोपीय देश जिनको अधिकांश श्रेय जाता है अंतर्राष्ट्रीय कानून को रचने बुनने का।

आस्तिकवादि विचारों में international law तो एक साज़िश है पश्चिमी देशों की, और इसलिए सबसे प्रथम आपको अपने धर्म को बचाने के लिए अपने देश को international law से बचाना होगा, यानि "विदेशी ताकतों से बचाना होगा"।

तो फिर secular नहीं होने पर सबसे पहले राष्ट्रवादि बनना होगा, अपने देश और धर्म की रक्षा करनी होगी, और विदेशी ताकतों के गोपनीय हस्तक्षेप से अपने देश को बचाना होगा।

क्योंकि आप आस्तिवादि हैं, यानि secular नहीं है।

आप तैयार हैं, Mr Non Secularism जी ??