Thursday, May 05, 2016

क्या justice और fairness के मध्य कोई अंतर होता है ?

क्या justice और fairness के मध्य कोई अंतर होता है ?

भारत में अधिकांश लोगों को हम 'हक़ की लड़ाई' लड़ते हुए सुनते हैं। हक़ शब्द का हिंदी अनुवाद 'अधिकार' शब्द है, जिसे अंग्रेजी में Rights बोलते हैं। इसलिए कहीं कहीं एक पर्याय के रूप में 'अधिकार की लड़ाई' भी सुनने को मिलती है। इसी विचार को न्याय की गुहार भी बुला दिया जाता है, जिसे अंग्रेजी में justice कहते हैं।
  आपने कभी सोचा है की क्या justice और fairness को एक ही विचार और एक दूसरे का पर्याय माना जाना चाहिए ?
   justice शब्द का हिंदी अनुवाद न्याय है। कुछ हिंदी शब्दकोष fairness का अनुवाद निष्पक्षता बताते है। समस्या यह है की निष्पक्षता शब्द के लिए अंग्रेजी शब्द neutrality भी है। मगर neutrality और fairness को अंग्रेजी संस्कृति में एक समान विचार नहीं मानते हैं। तो सवाल उठता है की fairness शब्द के लिए उपयुक्त हिंदी क्या होगा ।
  यहां पर मुझे हमारी एक हज़ार सालों से गुलाम हुई सभ्यता की क्षत् विक्षत प्रभाव  दिखाई देते हैं। fairness के प्रति हमारे चिंतकों ने कुछ अधिक लेखन कार्य नहीं किये हैं। यहाँ तक की fairness के लिए हमारी संस्कृति और भाषा में एकीकृत शब्द रचना भी नहीं हुई है।
   कुछ अंग्रेजी विचारकों का मानना है की justice और fairness एक पर्याय विचार नहीं हैं। उनके अनुसार न्याय से अभिप्राय राज्य द्वारा सुनिश्चित अधिकारों के भोगने से होता है। जबकि fairness से अभिप्राय मनुष्यों के समूह में आपसी व्यवहार में 'परस्पर समानांतर आदान प्रदान' से होता है। fairness को level playing field समझा जा सकता है, जिसके लिए कोई एकीकृत हिंदी शब्द है ही नहीं। level playing field को हिंदी में 'समान स्तर रणभूमि'  या फिर "निरझुकाव भूमि" समझा जा सकता है।
       यहाँ मुझे एक भौतिक सामाजिक समस्या -भेदभाव- का कारक दिखाई देता है। सामाजिक आदान प्रदान के दौरान किसी व्यक्ति को कैसे ज्ञात होता है कि क्या आचरण निरझुकाव अथवा समान-स्तर है, या फिर की नहीं ?
     शोषण हमारे देश में हुए भेदभाव का आर्थिक सारांश रहा है। शोषण का अभिप्राय है श्रमिक को उसके स्वामी के द्वारा समान स्तर नियम व्यवस्था या फिर निरझुकाव भूमि को प्रदान नहीं करवाना। यानि, नियमों का ऐसा जंजाल तंत्र बनना की स्वामी हमेशा आर्थिक और न्यायिक लाभ में रहे।
   शोषण कि समस्या का निवारण बहोत सारे विचारकों ने न्याय में तलाश किया है। मगर मुझे यही पर उसके समाधान मार्ग में गलती हुई महसूस होती है। शोषण की समस्या का समाधान न्याय में नहीं, चेतना जागृत करने में है कि स्वामी और श्रमिक के मध्य आदान प्रदान के दौरान सम-स्तर व्यवहार , या निर्झुकाव आचरण कैसा होना चाहिए।
    मुझे लगता है की झुकी हुई भूमि पर जीवन यापन करने वाले व्यक्ति को शायद इसकी संवेदना स्वयं आ सकती है कि वह झुकी भूमि की समस्याओं से ग्रस्त है। मगर वह फिर भी आसानी से यह ज्ञात नहीं कर सकता है की निरझुकाव भूमि (सम-स्तर भूमि) कैसी होती है, और उसकी जीवन शैली कैसी होती है।
   संक्षेप में कहें तो, लंबे युगों तक भेदभाव वहन किये व्यक्ति को न्यायसंगत , निरझुकाव आचरण का मार्ग स्वयं ज्ञात नहीं हो सकता है। इसका अर्थ यह है की गुलामी की बेड़ियों से ताज़ा-ताज़ा आज़ाद हुआ व्यक्ति अभी भी अपने को गुलाम की तरह ही जीना पसंद करेगा; वह ऐसी गलतियां करेगा जिससे वह वापस गुलाम बन जाये। गुलामी से आज़ाद हुए व्यक्ति को आज़ादी का जीवन जीना सिखाना पड़ेगा यदि उसको वाकई दीर्घकालीन स्वतंत्रता प्रदान करवानी है तो।
     साधारण तौर पर प्रत्येक मनुष्य को fairness का ज्ञान बाल्यकाल में क्रीड़ा भूमि पर होते आपसी वाद विवाद में प्राप्त होता है। खेल कूद में क्रीड़ा नियम और उनके औचित्य को सोचने पर हमें fairness की समझ आती है। इसी तरह, किसी और भी आपसी प्रतिस्पर्धा वाले कार्य के दौरान हमें fairness क्या है और क्या नहीं है का स्वःज्ञान प्राप्त होता है। श्रम प्रबंधन और श्रमिक प्रशासन में fairness के नियमों का बहोत गेहरा उपयोग है। श्रम कानून में unfair labour practises का जिक्र बहोत महत्वपूर्ण है। इसलिए क्योंकि श्रम नियंत्रण में अवैध अथवा illegal को तय कर सकना मुश्किल होता है। यह आवश्यक नहीं है की जो unfair है, वह किसी right के उलंघन के द्वारा ही किया जा सके। unfair और rights का उलंघन एक दूसरे से सम्बद्ध कदाचित नहीं होते हैं; unfair और illegal एक विचार नहीं हैं। जहाँ राइट्स का उलंघन होता है, वहां illegal होता है।  illegality का सम्बन्ध justice से है। यानि, श्रम प्रबंधन में justice कर सकना मुश्किल होता है,क्योंकि अक्सर स्वामी अपने श्रमिक के rights को तोडे बीना भी unfair लाभ प्राप्त कर लेता है। justice के स्थान पर fairness का उपयोग किया जाता है, और unfair labour practises की सूची बनाई गयी है जो कि उधाहरण द्वारा पक्षपात अथवा भेदभाव आचरण को झलकती है।
   इसी तरह से किसी कारोबार में आपसी प्रतिस्पर्धा में भी कानून की निष्पक्षता को झुकाव की तरह उपयोग करके अनौचित्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस समस्या से निवारण के लिए unfair trade practises का जिक्र होता है।
    क्योंकि unfair और illegal एक विचार नहीं हैं, इसलिए justice और fairness भी एक और समान अर्थी नहीं हैं
       श्रमिक प्रबंधन और किसी भी प्रतिस्पर्धा (competitive field)  में घटित गलत(wrong) का निवारण justice से कहीं अधिक fairness से जुड़ा होता हैं।