Tuesday, May 24, 2016

पढाई लिखाई आवश्यक नहीं है, ...आवश्यक है ज्ञान का संरक्षण

(उनके लिए जो की जीवन में पढाई लिखाई को सबसे महत्वपूर्ण मुक्ति का वाहन समझते हैं।
उनके लिए भी , जो यह समझते हैं की कॉलेज डिग्री को जीवन में आवश्यक मनना एक गलत विचार है।)

पढाई लिखाई महत्वपूर्ण नहीं होती। न है व्यक्तिगत जीवन मुक्ति के लिए,और न ही सामाजिक जागृति और उत्थान के लिए ।
महत्वपूर्ण है ज्ञान का कोष निर्माण, संरक्षण और प्रसार ।
अब क्योंकि ज्ञान को निर्मित करने और प्राप्त करने का सबसे प्रत्यक्ष तरीका पढाई-लिखाई ही है, इसलिए कई सारे लोग पढाई लिखाई को ही सबसे महत्वपूर्ण संसाधन मानने लग जाते हैं।
      सामाजिक उत्थान में आवश्यक बिंदु है की समाज में भिन्न भिन्न गुणों और कौशल के लोग हो जो मिल जुल कर सामाजिक उत्थान का मार्ग निर्माण करें। ऐसे में विभिन्न और विशाल भेदों वाले कौशल का विकास आवश्यक हो जाता। यहाँ समस्या आती है की पढाई लिखाई का मार्ग बहोत सारे कौशलों के विकास में एक बाधक होता है। उधाहरण के लिए, कला, क्रीड़ा, exploration यानि खोज यात्राएं , इत्यादि। इस सभी क्षेत्रों के उत्कृष्ट कौशल को विक्सित होने के लिए मनुष्य को अपने बाल्य अवस्था से ही ध्यान केंद्रित करना पद सकता है,जिसके दौरान वह किसी दूसरे अति ध्यान बंधित कार्य, यानि पढाई लिखाई को नहीं निभा सकता है।
   इस तर्क पर हम समझ सकते हैं की क्यों पढाई लिखाई को महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता है।
   मगर, विभिन्न कौशलों के उत्कृष्ट विकास के दौरान भी हमें जिस समस्या का सामना कर पड़ सकता है की एक सम्पूर्ण उत्पाद के निर्माण में , या की किसी भी सामाजिक समस्या के निवारण के लिए ..हमें इस सभी कौशलों के गठ जोड़ बनाने की क़ाबलियत भी विकसित करनी पड़ेगी। यानि connecting surface समस्या का सामना कर सकता है। यहाँ हमें connecting surface समस्या का निवारण करने के लिए हमें तमाम कौशलों के विशिष्ट ज्ञान का एकीकृत इनसाइक्लोपीडिया या फिर पुस्तकालय निर्मित करना पड़ेगा। हमें अब या तो उम्मीद करनी पड़ेगी की कुछ एक नागरिक स्वेच्छा से इस पुस्तकालय से ज्ञान ले कर कौशलों के गठजोड़ से उत्पाद निर्मित करेंगे; या फिर हमें वापस पढाई लिखाई को अनिवार्य करते हुए कुछ मनुष्यों को बाल्यकाल से ही उस पुस्तकालय से ज्ञान अर्जित करवाना होगा।
    यानि, बात घूमती हुई पढाई लिखाई की अनिवार्यता के तर्क पर लौट आती है।
हाँ,एक विकल्प भी दिखाई देने लगता है की कैसे पढाई लिखाई की अनिवार्यता का निपटारण करते हुए भी उत्पाद का निर्माण किया जा सकता है। वह विकल्प यह है की यदि स्वयं स्कूली शिक्षा और पढाई लिखाई की और ध्यान नहीं दे सके हैं ,तब भी स्वेच्छा से अपने कौशल के द्वारा किसी भी उत्कृष्ट उत्पाद के मद्देनज़र हमेशा तैयार रहे पढ़े लिखे मित्रों और रिश्तेदारों का सहयोग लेने के लिए।