अगर Lord Dicey भारत में पैदा हुए होते तो...

Lord Dicey ने जो न्याय के सिद्धांत दिए थे वह मात्र संभावना की बुनियाद पर टिके थे कि 'कोई भी इंसान खुद अपने विरुद्ध फैसले नही सुनाता है। '
Lord Dicey के सिद्धांत दुनिया भर के rational समाज मे स्वीकृत किये गए।
मगर कल्पना करिए यदि यही कोई Dicey जैसा व्यक्ति भारत के ब्राह्मणवादी समाज मे ऐसी कुछ बात कहता तो उसको कैसे-कैसे उत्पीड़न से उसके सिद्धान्तों को स्वीकार नही किया जाता
-- यह dicey तो हर इंसान को झूठा और मक्कार समझता है
-- dicey को लगता है कि बस वही सच बोलता है।
- dicey दूध का धुला है, बाकी सब चोर हैं
-- भारत की संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है dicey। यहां राजा हरिश्चंद्र से लेकर सचिन तेंदुलकर तक ईमानदार लोग रहे हैं जो कि आउट हो जाने पर खुद ही पवेलियन लौट जाते है अंपायर के इशारे का इंतज़ार किये बिना।
- dicey जजों को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है कि सब जज झूठे होते हैं।
- dicey न्यायपालिका पर उंगली उठ्ठा रहा है,
-- dicey ने सारे जजों को चोर कहा
-- निर्वाचन आयोग का कहना है कि dicey ने कोई भी empirical सबूत नहीं दिया है कि जज झूठ बोल सकते हैं अपने खिलाफ मुक़दम्मे की सुनवाई के दौरान

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