लॉजिक, लॉजिकल फॉलसि, और चुनावी पार्टियां

लॉजिक को कंप्यूटर, लॉ,  विज्ञानं और गणित के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है। लॉजिक में यह लोग वाकई में जीरो है।
लॉजिक प्रयोग करने का फायदा यह होता है कि यह किसी भी धर्म,जात , वर्ण के व्यक्ति को लॉजिक से निकली बात, निष्कर्ष, कारक आसानी से समझ आ जाती है। तो लॉजिक के प्रयोग से आपसी वैमनस्य , भेद भाव जैसे दुर्गुणों को पार लगाया जा सकता है।
  दूसरे शब्दों में, लॉजिक को सेकुलरिज्म का सूत्रधार मान सकते हैं।
मगर यह क्या !! भाजपा वाले तो वैसे ही एंटी-सेकुलरिज्म है !! शायद वह खुद भी मानते है की वह सेकुलरिज्म के साथ साथ लॉजिक को त्याग कर चुके है।

लॉजिक की कमी यह होती है कि लॉजिक में गलती होना आसान होता है। और जब कभी लॉजिकल मिस्टेक होती है तब पूरा का पूरा समुदाय वह मिस्टेक कर देता है। लॉजिक की मिस्टेक को लॉजिकल फॉलसि (logical fallacy) कहते हैं। कांग्रेस के लोग लॉजिकल फॉलसि से ग्रस्त थे। इसलिए वह उटपटांग , उल्लूल जुलूल लॉजिक लगा देते थे। सेकुलरिज्म के नाम पर तुष्टिकरण कर रहे थे।

Comments

Popular posts from this blog

Origin of the word "Jugaad"

The problem with India Against Corruption (www.indiaagainstcorruption.org)