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Showing posts from January, 2015

भाजपा और उनके दोमुंहे तर्क

भाजपाइयों ने एक साथ दोस्ती और दुश्मनी का ऐसा ताना बाना बुन है की आम आदमी अगर इनके तर्कों को बिना अपनी अंतरात्मा के प्रयोग से सुलझाये पकड़ेगा तब वह व्यक्तिगत जीवन में एक बुद्धिहीन मनुष्य बन कर विकसित होगा।
  अधिकांश भारतीयों को भी यही समस्या है। हमारी वर्तमान संस्कृति में तर्कों का एक विचित्र ताना बाना बंधा हुआ है जिसमे जन्म ले रहे नवजात बड़े होते होते अपने अन्दर की सृजन क्षमता को खो देते हैं, अंतर्मन को नष्ट कर देते हैं, माया और भ्रम के जाल में पल-बड़ कर उनके बौद्धिक गुण ख़त्म हो चुके होते हैं।
   इस विरोधाभासी ताने बाने के अस्तित्व को हम सभी पहचानते भी हैं। इस ताने बाने को कभी तो हम लोग अपनी गंगा जमुनी सभ्यता बुलाते हैं, कभी करोड़ों देवी दवताओं वाला प्राचीन धर्म, कभी हमारी धार्मिक, संस्कृति और राष्ट्रिय विविधता , और कभी हमारा विश्व का सबसे विशाल संविधान।
   जहाँ यह विरोधाभासी ताना बाना हमारी अस्तित्व बनाये रखने का सबसे बड़ा गुण हैं, वही यही ताना-बाना हमारी बुद्धि पर पड़ा सबसे बड़ा पर्दा है जो हमे दार्शनिक रूप में विकास करने में बाँधा बन रहा है।
   भाजपा के कुछ एक विरोधाभासी हथकंडों पर धय…

भाजपा की 'सकारात्मकता' है क्या?

भाजपाई जिसको सकारात्मकता बुलाते हैं, और जिसे भंग कर के नकारात्मकता फैलाने का आरोप वह आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल पर लगा रहे हैं, मैं उसे Reality Distortion Field (RDF) बुलाता हूँ।
  RDF को हिंदी रूपांतरित करके मैं उसे वास्तविकता वक्रता क्षेत्र बुलाता हूँ। RDF से सम्बंधित विकिपीडिया पेज का लिंक यहाँ सलंग्न है। इस प्रत्यय को लोकप्रिय कंप्यूटर कंपनी ऐप्पल कंप्यूटर के  कर्मचारी बड ट्रिब्ब्ल ने अपने ceo स्टीव जॉब के लिए प्रयोग किया था। बड ट्रिब्ब्ल का कहना था की उन्होंने यह शब्द टीवी के प्रचलित धारावाहिक स्टार वार्स में से लिया था। बड ट्रिब्ब्ल की व्याख्या में स्टीव जॉब अपने मोहित व्यवहार, व्यक्तित्व, बड़ बोली, झूठ और गुप्प, और बाज़ार विक्रय के माध्यम से अपने इर्द गिर्द एक वास्तविकता वक्रता क्षेत्र RDF बना लेते थे, और इस क्षेत्र के प्रभाव में आने वाले लोगों को लगता था की स्टीव के लिए कुछ भी असंभव नहीं है ,इसलिए वह स्टीव पर आँख मूँद कर, एक अंधभक्त की तरह भरोसा करते थे।
    मेरे ख़याल से RDF का विवरण वैदिक युग के वरणित "माया जाल" के विचार के समतुल्य है, जिसमे साधारण, चैतन्य हीन…

भाजपा समर्थक और आप पार्टी समर्थकों के चरित्र में क्या क्या अंतर हैं ?

भाजपा समर्थकों और आम आदमी पार्टी के समर्थकों के मध्य का बौद्धिक और भावनात्मक अंतर किसी औपचारिक अध्ययन के लिए रुचिकर विषय बन सकता है।
   मानव संसाधन के क्षेत्र में इन दोनों राजनैतिक पक्षों का दृष्टिकोण भिन्न भिन्न व्यवहार के प्रवहत करेगा, और दोनों पक्षों के समर्थक अपने व्यक्तिगत जीवन में अलग अलग किस्म के नेत्रित्व और कर्मचारी व्यवहार का प्रदर्शन करेंगे।
    इस लेख का उद्देश्य इसी मानव संसाधन और प्रबंधन के क्षेत्र में एक चर्चा को आरम्भ करने का हैं।
   भाजपा के समर्थक अधिकाँश तौर पर परम्परागत सामंतवादी मानसिकता वाले लोग हैं जिनका मानना है की समाज पर सही और गलत दिशा निर्देशित सिर्फ डंडे के बल पर ही किया जा सकता है। हालाँकि यह प्रजातंत्र की प्रसिद्धि से अवगत हैं ,और इस कारण यह स्वयं को प्रजन्तान्त्रिक घोषित करने में कोई कौतुही नहीं बरतते, मगर अपने व्यवहार में यह सामंतवादी, "अनुशासन कारी", "सम्मान-संवेदित" लोग हैं जो की प्रजातंत्र के गुणों का पालन कतई नहीं करते हैं। वाद विवाद, बहस ,शास्त्रार्थ से तो यह कन्नी काटने वाले लीग हैं।
  मोदी और बेदी के व्यवहारों में इस विचार के…

How Kiran Bedi is acting to exploit the lack of logical thinking among Indians

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Kiran Bedi has called for a public debate with Arvind Kejriwal.

Kiran does not have anything new , any other point which the BJP Supporters have constantly been cross-accusing Kejriwal, in order to save their economic interests which are fulfilled through the culture of corruption prevailing in the administration. The political saving can only be brought about when Kejriwal is defeated , hence they need to engage him such without looking to be corrupt themselves.
   Thankfully the train of human reason provides enough shunting points where the clarity can be obscured, obfuscation of information achieved.
  Arguments between the right and the wrong can be confused out if the mental abilities are suppressed and degraded. If people can be confused on how much similar is the colour Pink from the Red, and how much different are they othwrwise, where which colour can be suited-- the Corruption has found its heaven just over there.
   It is the same situation which now prevails between Kira…

Prohibition on tipping is not meant to say that tipping is illegal.

Dear A###,
I don't know whether you will take it in kind sense or not, but i really wish to enlighten you and the world about Tipping and the Bribery , and that it is Bribery which is fundamentally hurting to the society, not the tipping.
  The laws pertaining to 'prohibition' on tipping are basically the bye-laws ( e.g. 'circular", departmental orders) but nothing of a statutory laws passed by any Parliamentary body, which are the law of the land.
   Bye-laws or even the Parliamentary laws can be contested, as the need arrive, if somebody is being wronged because of such a law. As an employee of a any organization, our submission to such a law is NOT the ultimate proof of legitimacy of the bye- laws. People accept the submission for economic compulsions as well. Therefore if a bye-law to which we have otherwise given ascent troubles us,we can challenge it.
  This  above theory is meant to say that Tipping cannot be reasoned to be unlawful merely by citation of a…

Lord Macaulay was probably indulging in polemics when he uttered these words

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Lord Macaulay was probably indulging in polemics when he uttered these words

India cannot afford to miss Kejriwal

Have we accounted out all possibilities for the next slaughtering of the Anti-Incumbency wave ?
    Kejriwal's defeat will be a sure sign of the revival of the Congress. How many of us realize this. What's more ironic is that Kejriwal's struggle against the BJP is also going ti set the power game in favour of the third player-which again is Congress.
  I believe and assume that the larger section of Kejriwal's following are the Congress converts. The only reasonable cause of their disenchantment with congress was the extreme Corruption, and the excessive Appeasement factor which resulted into a blatant anti-national conduct of the ministers. This was so much visible in the Congress cabinet of ministers.
  For many of the Kejriwal converts, Whereas Appeasement could have got tolerated for a while, there was no room for anti-nationalism . The appeasement coupled with extreme, blatant shameless acts of Corruption painted the worst, horrible public image of Congress that …