इतिहास के संग छेड़छाड़ क्यों नहीं करनी चाहिए


मोदी सरकर अपने कार्यकाल में स्व:घोषणा से तो मुगलों के बनाए वास्तुशिल्प उत्कृष्ट इमारतों को तोड़ हटाना के बाद अंग्रेजों के बनाए तमाम कानूनों को मिटाने, बदलने, "नवनिर्माण" करने में लगी हुई है

मगर वास्तव में ये लोग जातिवाद, भेदभाव का प्रसार, तथा समाज निर्माण का cement यानी आपसी विश्वास में मिलावट, कर रही है। तथ्यिक इतिहास के संग छेड़छाड़ भारत उपमहाद्वीप पर बसे तमाम समुदायों के बीच में mutual trust निर्मित करने की निर्माण सामग्री को मिलावटी बना देगा। 
जगहों का , स्थानों का नाम भी उनकी एतिहासिक तथ्यों को संरक्षित करता है। इन नामों को रातोंरात बदल देना — केवल घृणा और बैर के चलते — ये इतिहास के संग छेड़छाड़ है। 
इतिहास के तथ्य भी समाज निर्माण की cement यानी mutual trust की सामग्री होते हैं, तमाम अन्य सामग्रियां, जैसे कि कानूनों, के इलावा। सो, उनको बदलने का अर्थ होता है cement में मिलावट करना। समुदाय अगर कभी आपसी स्पर्धा या विवाद में उलझ गए भविष्य में, तब कोई न्याय का आधार नहीं मिलेगा बड़े–बुजुर्ग जन लोगों को कि समझौता करवा सकें ! संघर्ष पर विराम लगाना मुश्किल से असंभव हो जाएगा !

अंग्रेजों की धरोहरों -भवन एवं कानूनों -का भी यही cement वाला योगदान है भारत के समाज पर। ये सब एतिहासिक तथ्य है जो भारत भूमि को एक "देश" से एक "राष्ट्र" बनाते है। 

सरकार के कर्म वहां घात कर रहे हैं।

और सबसे खराब धरोहर , अंग्रेजों की, उसको देख भी नहीं रहे हैं -बाबूशाही - यानी ये IAS , IPS वाली नौकरियों और उनके प्रवेश और चयन वाला वर्तमान का तरीका - UPSC की प्रवेश परीक्षा ! IAS लोगों के रोजगार कार्यकाल के नियम ! ये जो असल कारक हैं, बदहाली के, उनको पूछ तक नहीं रहे है ! देखना और बदलना तो छोड़िए।

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