जीलैंडिया की खोज और मापदंड में इंसानी चाहत की प्रभुसत्ता से मुक्ति

जीलैंडिया असल में जल मगन महाद्वीप (continent) है जिसका सिर्फ 5~8 प्रतिशत ही सतह पर है। जलमग्न जीलैंडिया के पर्वतों में से कही पर पानी से बहार निकलते तीन पर्वतों की चोटी पर ही बसा द्वीप देश है न्यूज़ीलैंड ।
बड़ी बात यह है की जलमग्न होने के बावज़ूद वैज्ञानिक इसको एक महाद्वीप के रूप में सम्मानित करने को बाध्य महसूस कर रहे हैं। कारण यह है की इसकी संरचना अपने आस पास के जलमग्न भू-plate के मुकाबले भिन्न पायी गयी है। फिर आगे की शोध में इसका पशु जीवन ,वन्यजीवन और वनस्पति भी एकदम नज़दीक की ऑस्ट्रेलिया भू -प्लेट से भिन्न पाया गया है।  भूकंपो के अध्ययन में भी ज़ीलैंडिया tectonic प्लेट को ऑस्ट्रेलिया plate से घर्षण करते समझा जा चुका है जो की इसका ऑस्ट्रेलिया से भिन्न होने का एक और प्रोत्साहित करता प्रमाण है।यह सब प्राकृतिक तथ्यों का समावेश वैज्ञानिकों को बाध्य कर रहा है की वह राजनैतिक या इंसानी मनमर्ज़ियों के बाहर आ कर प्राकृतिक तथ्यों के आगे नतमस्तक हो का ज़ीलैंडिया को धरती के आठवें महाद्वीप के रूप में स्वीकार करने लगें, तब जबकि इसकी 90 % से ज्यादा बड़ी भूमि जलमग्न है।

कभी कभी किसी की पहचान इंसानी चाहतों या राजनैतिक प्रभुसत्ता की मोहताज नहीं रह जाती है। तब जबकि प्रकृति ने खुद उसको विशिष्ट चिन्हों से नवाजा हो की उसके प्रोत्सहन प्रमाण सर्वप्रकट हो कर उसकी घोषणा करते हों।

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