Saturday, July 29, 2017

The long rope theory of discriminating

The long rope theory of discriminating

भेदभाव और असमानता इंसानी समाज मे हमेशा से चलते चले आये हैं। इंसानी समाज आपस मे प्रतिस्पर्धा करते हैं और हर समाज खुद को दूसरे से बेहतर साबित करवाना चाहता हैं । इसी इंसानी प्रवृति ने दुनिया भर में सामंतवाद को जन्म दिया, रंगभेद करवाये, अन्तरसमुदायिक कलह करवाई, जातिवाद करवाया।

हालांकि प्रजातंत्र के क्रमिक विकास में भेदभाव का विरोध और समानता की लालसा भी एक अंश रहा हैं, मगर फिर भी प्रजातंत्र पूरी तरह सफल नही हो पाए हैं। असमानता और भेदभाव आज भी किया जाता है।
प्रजातांत्रिक न्याय व्यवस्था में प्रशासन को जहां rule of law से चलना होता है, फिर भी भेदभाव की नवयुग पद्धति का भी क्रमिक विकास हो गया है। 

प्रजातांत्रिक प्रशासन प्रणाली में भेदभाव करने की नई पद्धति कुछ इस तरह से है :--
The long rope theory of discriminating

प्रशासन और न्यायव्यवस्था में जिसका वर्चस्व है, वह अपने पसंदीदा लोगों को उनकी गलतियों , अपराधों और नियम उलंघनों को अनदेखा करता रहता हैं। गलत तौर तरीकों से लाभ कमाने का मौका दिया जाता है, प्रशासन को ढील दे कर।

मगर वही पर अपने नापसंद लोगो  को ठीक वैसे ही अपराधों, नियम उलंघनों पर प्रशासन तुरन्त कार्यवाही करके सज़ा देता है। 

गौर करने की बात यह है कि आर्थिक या मानवीय अपराध  तथा नियम उलंघन तो दोनों ही पक्षों ने किया था, मगर सज़ा सिर्फ उस पक्ष को मिली जिसकी राजनैतिक और प्रशासनिक पकड़ कमज़ोर है।

यह भी भेदभाव करने करने का एक जटिल तरीका है। जटिल इसलिए क्योंकि अब कमज़ोर प्रशासनिक पकड़ वाला पक्ष आसानी से अपने व्यक्ति का बचाव भी नही कर सकता है क्योंकि बचाव में बोले जाने वाले शब्दो और अर्थो का जंजाल बहोत जटिल हो जाने वाला है। बचाव में बोले जाने वाली भावनाओं का उद्देश्य भले ही यह हो कि गलती तो हमारे पक्ष ने करि मगर दूसरे ताकतवर पक्ष ने भी तो वही ही किया था, फिर सज़ा अलग अलग क्यो ; सज़ा में भेदभाव क्यों। 
मगर शब्दो का जाल ऐसा बन जाता है कि मानो कहना यह चाहते हों कि वह अपने पक्ष की गलतियों को अस्वीकार कर रहे हो, न्यायपालिका को तिरस्कार करते हो।

यही नवयुगी भेदभाव पद्धति की जटिलता है। इसमें भेदभाव को किये जाने का मार्ग कुछ पीछे(उल्टे) के रास्ते से गुज़रता है। ऐसा करने से कमज़ोर पक्ष के लिए भेदभाव की व्यथा को उजागर करने के शब्द कमज़ोर पड़ जाते है और वह अपनी व्यथा को आसानी से व्यक्त ही नही कर पाता है।

अपराध की अनदेखी, प्रशासनिक अन्वेषण अथवा पुनर्निरक्षण के दौरान शिथिलता, न्यायपालिका में प्रमाणों का असमान मूल्यांकन, या घटनाओं की समानता को जानबूझ कर कृत्रिम अंतरों के माध्यम से भिन्नता दिखाना , नित नए फैसलों के माया जंजाल निर्मित करना, इत्यादि नवयुग प्रजानतंत्रिक प्रशासन में भेदभाव करने का तरीका है।

इसी को हम संक्षेप में कह सकते हैं the long rope theory of discriminating.

इंग्लिश कहावत Give someone a long rope के अर्थों पर इस सिद्धांत का नामकरण है, इसे आसानी से समझने और स्मरण रखने के लिए।