Posts

Showing posts from June, 2017

जॉर्ज ओरवेल का विकृत कलयुगी उपन्यास "1984"

4 अप्रैल 2017 को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के विरोध में देश के करीब 200 सिनेमा घरों में एक 1956 में रिलीज़ हुई श्याम/श्वेत फिल्म को फ्री में जनता के लिए नुमाइश करवाया गया। फ़िल्म का नाम था "1984"।

क्या है यह फ़िल्म "1984" , और क्या सम्बद्ध है इस फ़िल्म का राष्ट्रपति ट्रम्प से ? 
 "1984" नाम की यह फ़िल्म अंग्रेजी उपन्यासकार जॉर्ज ओरवेल के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इस उपन्यास को ऑरवेल ने 1949 में लिखा था, और काल्पनिक श्रेणी का उपन्यास है जो कुछ राजनैतिक-प्रशासनिक व्यवस्था पर रचा बुना है।  मगर इतने पूर्वकाल में भी लिखे हुए होने के बावजूद इस उपन्यास में ऑरवेल की काल्पनिक शक्ति इतनी सटीक है कि वह जिस कलयुगी-विपरीत(dystopic) भविष्य की कल्पना करके सं 1984 को अपने ख्यालों में गढ़ते है, काफी सारे लोगों का मानना है कि वह आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के काल में सत्य होता साबित हो रहा है। 
सिनेमाघरों के मालिकों का मानना है कि जन जागृति के लिए इस उपन्यास और उस पर आधारित फिल्म का मंचन मुफ्त में करना राष्ट्र और सामाजिक हित में आवश्यक हो गया है।
 Orwe…

आरएसएस और उनकी भेदभाव को प्रसारित करती कानून व्यवस्था

आरएसएस का कहना है कि वह जातपात में विश्वास नही करता है। और फिर अपने खुद के गढ़े हुए *तथ्य* के मद्देनजर वह आरक्षण नीति का भीतर ही भीतर विरोध करता है यह तर्क देते हुए की *आरक्षण नीति से तो जातपात और अधिक फैलेगा* ।खुद से मुआयना करने की ज़रूरत है कि क्या वाकई में आरएसएस जातपात में विश्वास नही करता, या सिर्फ एक lip service यानी मुंहजबानी बोल्बचन कर रहा है । जो संस्था *थूक कर चाटने* वाली नीतियों के लिए बदनाम है, कांग्रेस पार्टी की *gst,आधार* से *मनरेगा* तक जिन नीतियों का विरोध किया और फिर *थूक कर चाटते हुए* खुद वही ले आयी, यानी जो कि सामान न्याय व्यवस्था में विश्वास ही नही करती, क्या वह वाकई में भेदभाव नही करने वाली संस्था हो सकती है ?जातपात आखिर है ही क्या ?
भेदभाव ।
और भेदभाव कैसे किया जाता है ?
असमान न्याय , अप्रकट न्याय, अघोषित कानून ही तो भेदभाव है।
अभी ndtv पर हुए cbi रेड की कहानी को ही देख लीजिए। या फिर भ्रष्टाचार निरोध के नाम पर आम आदमी पार्टी के लोगों पर आए दिन हो रहे कार्यवाही को देख लीजिए। मोदी पर सहारा और बिरला से करोड़ों रुपये लेने का सबूत तक है, मगर रेड केजरीवाल के दफ्तर पर होती…