Friday, January 27, 2017

दो मुँही समस्या है परिवारवाद

परिवार वाद में समस्या का दो तरफ़ा अंश है। इसलिए परिवार की समस्या से निजात किसी एक व्यक्ति के कंवारे होने से उनको वोट दे कर *नहीं ही* मिलने वाला है।

परिवार वाद समस्या के दो तरफ़े मुँह को गौर करें :--
1) अगर किसी अमुक व्यक्ति 'अ' को उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के प्रभाव में जनमानस स्वीकृति करता है , *तो यह गलत है* क्योंकि *_किसी और योग्य की योग्यता की अनदेखी उसका तिरस्कार होगी_*।

2) अगर किसी अमुक व्यक्ति 'अ' को उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि के प्रभाव में जनमानस *अस्वीकृत* करता है, तो भी यह गलत होगा, क्योंकि यह एक प्रकार का भेदभाव, जात-पात का स्वरुप ही होगा।

यानि, बड़ा भेद यह है कि परिवारवाद की समस्या खुद ही *दोहरे चरित्र* की समस्या है।

इसलिए इसका निवारण यह तो हो ही *नहीं* सकता की *कंवरों को वोट दो*, या *_उनके परिवार ने देश को 70 साल लूटा, इसलिए अब हमें मौका दो_*।

इसका असल समाधान तंत्र सुधार में है। पद को ही सीमित कर दो। उधाहरण के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए कोई भी व्यक्ति 2 से अधिक बार निर्वाचित नहीं हो सकता।
हालाँकि यह भी कोई पुख्ता समाधान साबित नहीं हुआ है, मगर यह इस *दो मुँही समस्या* का *सर्वाधिक उपयुक्त* समाधान ज़रूर है। दुनिया के किसी भी देश में परिवारवाद का एकदम *पुख्ता समाधान* आज तक खोजा नहीं जा सका है। मगर *सर्वाधिक उपयुक्त* समाधान सभी अच्छे देशों में लागू है।