Thursday, November 10, 2016

Non-uniform civil code : आज़ादी के रास्ते आज़ादी को खत्म करने के उपाय

संविधान और प्रजातंत्र के चिंतकों का मानना हैं की प्रजातंत्र की आज़ादी का दुरूपयोग वापस अपने अपने धार्मिक गुट के भीतर अप्रजातंत्रिक मूल्यों को प्रसारित करने के लिए किया जा सकता है, ---जिसको करने से सुदूर भविष्य में एक ऐसी पीढ़ी निर्मित हो जायेगी जो की आज के इन प्रजातान्त्रिक मूल्यों को न तो जानती होगी और न ही इसके लिए संघर्ष करेगी ।
यानि आज मिली आज़ादी का उपयोग करके वापस गुलामी और दास प्रथा को सुलगाया जा सकता है ।
इसके लिए चिंतकों का कहना है कि संविधान में दिए गए व्यक्तिगत आज़ादी और अधिकारों के संरक्षण के लिए धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध जा कर भी प्रत्येक इंसान को वह उपलब्ध करवाने ही होंगे। अगर किसी व्यक्ति के साथ कुछ अन्याय, यानि वर्तमान प्रजातंत्र और संविधान के मानकों से कुछ गलत हो रहा है, जो की उसके धार्मिक मूल्यों से भले ही कुछ गलत न हो, तब भी उसे संविधान से दिए गए अधिकारों के अनुसार न्याय दिलवाना ही होगा, चाहे इस तरह उसके धार्मिक मूल्यों को चोट पहुचे।
इस प्रक्रिया को UNIFORM नागरिक संहिता बुलाया गया है।
COMMON नागरिक संहिता का अर्थ है की सभी नागरिकों पर , चाहे वह किसी भी धर्म के हो, उन सभी को एक ही तराज़ू से तौल कर उनकी प्रक्रिय संचालित करी जाये।
आज UCC के सम्बन्ध में भ्रम और गलती यह हो रही है की लोग बोल तो रहे है UNIFORM आचार संहिता, मगर उनके अभिप्रायों में COMMON आचार संहिता भी आ जा रही है, जिसका ज़ाहिरना विरोध हो जा रहा है ।
इस भ्रम से निवृत्र हो कर समझे तो सभी प्रजातंत्र के शुभचिंतकों को मानना ही पड़ेगा की UNIFORM सिविल कोड तो देश में होना ही चाहिए।