विश्वास समाज के निर्माण का आपसी योजक होता है

Trust is most important requisite for flourishing any business. Trust builds societies, trust builds nations.
Unfortunately , our country India is a low-trust society, which is visible in the form of innumerable factions our society suffers from, the myriad "vote banks" that keep affecting adversely our political majority.

Despite Trust getting identified as our key shortcoming, people think about Trust either as a 'State of Mind' (E.g. Blind faith), or else a commodity left in other's possession upon a term and condition that it must not be broken.
Trust is neither of it. Trust is a psychological discharge coming from our set of action-reaction with each other. Trust is discharged from our action when our choices become predictable to each other. Trust comes when our decisions flow from a commonly agreed principle. Trust is when we have a Uniform system of reward and punishment. Trust is, when we have a commonly known system of law and justice.

Trust is law and order.

विश्वास सबसे महत्वपूर्ण वस्तु होती है किसी भी उद्यम को स्थापित करने के लिए। विश्वास समाज की नींव है, विश्वास राष्ट्र का निर्माण करती है।
   दुर्भाग्य से हमारा देश भारत एक अल्प-विश्वास समाज है, जो की प्रत्यक्ष होता है जब हम अपने समाज में विभाजन के इतने सारे स्तर को देखते है, जब है तमाम वोट बैंक को देखते हैं जो की हमारे राजनैतिक बहुमत को कुप्रभावित करता है।
    
     बावजूद की हमने समाज में आपसी विश्वास की कमी को कारक के रूप में शिनाख्त कर ली है, कई सारे लोग विश्वास को कोई मनोवैज्ञानिक अवस्था (जैसे की अंध विश्वास)  समझते हैं, या फिर की कोई वस्तु जो वह किसी अन्य के पास छोड़ रखे हैं इस शर्त पर की टूटनी नहीं चाहिए।
   विश्वास इन परिभाषाओं में से कुछ भी नहीं है। विश्वास एक मनोवैज्ञानिक निष्पाद है जो की एक दूसरे की अंतर क्रिया में से प्रवाहित होता है। विश्वास तब प्रवाहित होता है जब हमारी कर्म क्रियाएँ पुर्वआभासित बनती है। विश्वास तब आता है जब हमारे निर्णय किसी साँझा सिद्धान्त में से निकलता है। विश्वास तब होता है जब पुरस्कार अथवा दंड के एक समरूपी तंत्र का पालन करते हैं। विश्वास बनता है जब एक कानून और न्याय का सिक्का चलता है।

विश्वास का अभिप्राय है कानून-व्यवस्था।

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