Tuesday, May 19, 2015

BODMAS Rule सैद्धांतिक दृष्टि से क्या है?


      गणित विषय में बोडमास(BODMAS) नियम किसी भी बहु-संक्रिय(multiple operation) सवाल को हल करने का क्रम(Order of operation) निर्धारित करता है। इस नियम की अनुपस्थिति में दो अलग अलग व्यक्ति एक ही समीकरण (equation) के लिए दो भिन्न भिन्न समाधान ले आएंगे। ((और फिर जैसा की भारतियों की कुसंस्कृति में रोज़ाना होता है, साधारण बीज गणित के सवालों पर भी हमारे बीच राजनैतिक-कूटनीति आरम्भ हो जायेगी की कौन सही है !!!))
   बरहाल, उधाहरण के लिए एक समीकरण लीजिये:
     3×5 +7-9 =?
यदि हम इस सवाल को बोडमास नियम से समाधान करें तब इसका हल कुछ यूँ होगा
    15+7-9
-->  22- 9
--> 13
जबकि यदि बोडमास नियम नहीं हो तब एक अन्य व्यक्ति इसी सवाल को कुछ यूँ भी हल कर देगा
    3×12-9
-->3×3
-->6
  बल्कि एक तीसरा व्यक्ति इसी प्रश्न का तीसरा समाधान भी ले आएगा।
तो समझा जा सकता है की बोडमास नियम सामंजस्य बनाये रखने के लिए कितना आवश्यक है।

सवाल यह है की बोडमास नियम की उत्पत्ति कहाँ से हुयी है?  क्या यह नियम किसी विशिष्ट व्यक्ति की धारणा से अस्तित्व में आया है? या प्रकृति की कोई एक शक्ति ने दुनिया भर में अलग अलग भाषा और संस्कृति वाले मनुष्यों को एक समान प्रभावित और प्रेरित कर के इस एकाकी नियम की और खींच ले आई है?

    रोजमरा में बोडमास नियम का यूँ ही प्रयोग करते हुए हम लोगों ने इस प्रश्न के उत्तर को शायद कभी सोचा भी नहीं होगा। और ज्यों ही यह प्रश्न हमारे सामने आएगा हम इसका हल तुरंत यही समझेंगे की भई बोडमास नियम तो एक धारणा (Convention) के अंतर्गत अस्तित्व में आया है। मगर तब फिर एक सवाल हमारे सामने खड़ा हो जायेगा की ऐसा कैसे की दुनिया भर के सभी मनुष्यों ने एक समान ही किसी धारणा को विकसित किया और एक जैसा नियम ही बनाया ??!! इस दूसरे प्रश्न के उपरान्त ही शायद हम में से कुछ को यह आभास आएगा की बोडमास नियम यूँ तो एक धारणा ही है मगर इस धारणा को संचालित और प्रभावित करने के लिए कोई एक अप्रकट प्राकृतिक शक्ति भी है।
   
        प्रकृति की शक्ति हमें सत्य के प्रति नतमस्तक होने के लिए प्रेरित करती ही रहती है। सत्य का अन्वेषण और उसको स्वीकार करना शायद सबसे बड़ी भक्ति है। हमारे भीतर अंतर्मन, या अंतःकरण की ध्वनि एक ऐसा संसाधन है जो की अतार्किक, अथवा कला बोधक विषयों में हमें सत्य की स्थिति का अन्तर्ज्ञान दिलाता रहता है। यह अंतर्ज्ञान निरंतर प्रयोग और अभ्यास के द्वारा ही शक्तिवान बनता है और कार्य कौशल प्राप्त करता है। सत्य जो भी होगा वह स्वयं-भू हो जायेगा । और साथ ही साथ, यदि मनएछित सत्य को प्रकट होने में विलम्ब हो रहा हो तब यही अंतर्मन में सत्य प्रकट हो जाता है की कही कुछ असत्य, भ्रम अथवा माया क्रियाशील है। मगर सत्य प्रकट जरूर होता है।
    हमारा अंतर्मन ही हमारे अंदर परिमेयकरण और न्याय का मुख्य स्रोत होता है। तो वैसे तो हम बोडमास रूल को एक धारणा मानते हैं मगर मनुष्य प्रजाति में बोडमास रूल का समानरूप विकास इस नियम का मूल स्रोत हमारे अंतर्मन की ध्वनि के होने हो दर्शाता है।
    
    वैज्ञानिक शोध बताते है की वर्ग विभाजन करने की योग्यता के पीछे शायद कोई प्राकृतिक शक्ति क्रियांवित रहती है। दैनिक रूप से जोड़ और घाट के सवाल करने के बावज़ूद हम से शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा की जोड़ और घाट के भौतिक तर्क गुण में कुछ तो भिन्नता है। यह अंतर है की जोड़न और गुणन की प्रकृति commutative है जबकि भाग देना और घटाने की प्रकृति non-commutative है।
    Commutative Property अर्थात सम-निवारण प्रकृति उसे कहते हैं जब किसी विषय वर्णवस्तु के स्थान अदला-बदली के बावजूद उनके समाधान में कोई प्रभाव नहीं पड़ता दिखाई देता है। तो a×b और a+b का समाधान a और b के स्थान बदल देने से कोई फर्क नहीं दिखाई देता है, और फिर b×a तथा b+a के बराबर ही रहता है। मगर a÷b तथा a-b का समाधान b÷a तथा b-a के परस्पर नहीं होता है।
     मनुष्य के मस्तिष्क में उसके मनोविज्ञान ने स्थान और संस्कृति के अंतराल के बावजूद समान रूप से  हम सभी को commutative property वाले संक्रय को -commutative property पर प्राथमिकता देने के लिए तैयार किया है। आखिर सरल संक्रय को जटिल संक्रय से प्राथमिकता देना मानव स्वभाव है।
    इसके साथ ही मनुष्य के सह-भाग मनोविज्ञान ने हमें कुछ संक्रय को दूसरे से अधिक शक्तिशाली अथवा महत्वपूर्ण स्वीकार कर लेने के लिए तैयार किया है , तथा उन्हें प्राथमिकता से समाधान करने के लिए प्रेरित किया है। तो इस प्रकार हम exponent और बीज वर्ग(roots) को गुणा-भाग से अधिक महत्वपूर्ण समझने के लिए तैयार किया है। 

     जबकि मानव मनोविज्ञान गुणा-भाग को जोड़-घाट से अधिक महत्वपूर्ण स्वीकार करने के लिए विक्सित हुआ है। कोषटकों (brackets, parenthesis) को हमने तमाम संस्कृतियों के अन्तराल में सबसे अधिक प्राथमिकता पर रखना स्वीकार किया है।

       एक ध्यान देने की बात यह है की गुना और भाग करने के दो अलग अलग स्वरूप् होते है। गुणा करने का एक of फॉर्म है और एक direct × फॉर्म। इसी तरह भाग देने का एक फॉर्म है slash / , एक दूसरा है direct ÷ फॉर्म। इनमे आपसी वरीयता कुछ यूँ है की × फॉर्म का गुणा commutative होने की वजह से , ÷ फॉर्म के भाग से अधिक महत्वपूर्ण है, और फिर / फॉर्म का भाग, जबकि सबसे निम्म है of फॉर्म का गुणा।
     2× 3 ÷8 of 4 / 4 = ??