Monday, January 26, 2015

भाजपा की 'सकारात्मकता' है क्या?

भाजपाई जिसको सकारात्मकता बुलाते हैं, और जिसे भंग कर के नकारात्मकता फैलाने का आरोप वह आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल पर लगा रहे हैं, मैं उसे Reality Distortion Field (RDF) बुलाता हूँ।
  RDF को हिंदी रूपांतरित करके मैं उसे वास्तविकता वक्रता क्षेत्र बुलाता हूँ। RDF से सम्बंधित विकिपीडिया पेज का लिंक यहाँ सलंग्न है। इस प्रत्यय को लोकप्रिय कंप्यूटर कंपनी ऐप्पल कंप्यूटर के  कर्मचारी बड ट्रिब्ब्ल ने अपने ceo स्टीव जॉब के लिए प्रयोग किया था। बड ट्रिब्ब्ल का कहना था की उन्होंने यह शब्द टीवी के प्रचलित धारावाहिक स्टार वार्स में से लिया था। बड ट्रिब्ब्ल की व्याख्या में स्टीव जॉब अपने मोहित व्यवहार, व्यक्तित्व, बड़ बोली, झूठ और गुप्प, और बाज़ार विक्रय के माध्यम से अपने इर्द गिर्द एक वास्तविकता वक्रता क्षेत्र RDF बना लेते थे, और इस क्षेत्र के प्रभाव में आने वाले लोगों को लगता था की स्टीव के लिए कुछ भी असंभव नहीं है ,इसलिए वह स्टीव पर आँख मूँद कर, एक अंधभक्त की तरह भरोसा करते थे।
    मेरे ख़याल से RDF का विवरण वैदिक युग के वरणित "माया जाल" के विचार के समतुल्य है, जिसमे साधारण, चैतन्य हीन मानव झूठ और फरेब को पहचान सकने में असफल होने लगता है और फिर वह झूठ को सच, सच को झूठ मानने लगता है। RDF के उपयोग का उदहारण: व्यापारी वर्ग अपनी दूकान की शोभा और माहौल के द्वारा दूकान में आने वाले संभावित उपभोक्ता को प्रभावित करके समान का सौदा सुनिश्चित करते हैं(Marketing)। बड ट्रिब्ब्ल का कहना था की स्टीव जॉब का RDF बहोत ही प्रबल था जिसकी वजह से वह अपने कंप्यूटर उत्पादों को बाज़ार में सफल बना लेते थे।
  एक परोक्ष नज़र में समझें तो RDF हमारे मनस्थल पर एक झूठी सकारात्मकता का पर्दा बिछाती है जिसमे की वास्तविकता हमारी मस्तिष्क की दृष्टि से ओझल हो जाती है; आशाओं का एक विश्वास मन में आता है जिसमे इंसान मृग तृष्णा को भी आशा समझने की गलती कर देता है, और अपने जीवन की/देश की समस्याओं को सुलझाने की बजाये, किसी अंधभक्ति में आ कर उन समस्याओं को भुला देने को ही उचित समाधान समझने लगता है।
   मेरी समझ से मोदी और उनके प्रचार कंपनियों ने भी अशिक्षित, चैतन्यहीन भारतियों पर इसी प्रत्यय RDF का प्रयोग करके राजनैतिक सत्ता प्राप्त करी है। RDF के द्वारा निर्मित जन आस्था के माहौल को यह लोग सकारात्मकता बुला रहे हैं । और अरविन्द केजरीवाल के असलियत को मायाजाल के पर्दों में से नग्न कर सबके सामने बार बार ले आने के प्रयासों को यह लोग नकारात्मकता बुला रहे हैं। केजरीवाल के प्रयास इनके RDF को बार बार भेद दे रहे हैं जिससे जनमानस चैतन्यवान हो कर असलियत का संज्ञान कर ले रहे हैं। इससे मोदी का RDF असफल हो जा रहा है।
  इसलिए भाजपाई केजरीवाल से दुखी है और केजरीवाल पर झूठा होने का आरोप न लगा कर नकारात्मकता फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।