Tuesday, August 12, 2014

हिंदुत्व और धर्म्तव में अंतर हो गया है

पाखंडियों ने 'हिंदुत्व' और 'धर्म' के मध्य अंतर प्रकट कर दिए हैं। अब हिन्दू होना और धर्म का पालनकर्ता होना एक समान विचार नहीं है। पाखंडी खुद को हिन्दू बताते हैं मगर धर्म संगत जीवन आचरण नहीं करते हैं। पाखंडी माला जपने, तथा आवश्यकता से कहीं अधिक , अपने विशाल दर्भ, अहंकार के अनुपात के मंदिर और मूर्ती निर्माण को 'हिंदुत्व' मानते हैं। वह अहंकार को भ्रमित करते हैं एक थोड़ी सी निम्न , कोमल मानवीय प्रतिक्रिय 'गर्व' से।
   गर्व सत्य से निष्ठावान होता है, जब की सत्य स्वयं श्रद्धा, विश्वास और सुन्दरता से अधिक क्ष्रेष्ट होता हैं।
  अहंकार पाखण्ड और माया से निष्ठावान होता है और इसलिए श्रद्धा, विश्वास (जिसमे अंध-विश्वास भी समाया हैं) और सुन्दरता से सम्बद्ध होता है। यह दोनों आचरण पाखण्ड तथा माया को पोषित करते हैं। इसलिए हिंदुत्व पाखंडियों का आचरण बनता जा रहा है, सत्यवान व्यक्तियों का आचरण तो धर्म कहलाता है।