सिद्धांतवाद -- एक बेतुकी राजनीति का अंत

   यह सिद्धान्तवाद का ही कमाल है है की जनता में यह स्पष्ट हो पा रहा है कि समाचार मीडिया भी पैसे के बल पर मरोड़ा हुआ चल रहा है। सिद्धान्तवाद आदर्शवाद में से ही प्रवाहित होता है मगर फिर भी आदर्शवाद से थोडा जुदा सा है।
   सिद्धान्तवाद को बस यूँ समझिये कि माध्यमिक स्कूलों में रसायनशास्त्र विषय में पढ़ाये जाने वाले "गैस के नियम" के सामान है। विभिन्न गैस कैसे आचरण करती हैं, यह अगर हम परस्परता में अध्ययन करते तो कभी भी किसी भी गैस को समझ नहीं पाते। अगर ऑक्सीजन की तुलना करके नाइट्रोजन और नाइट्रोजन से मुकाबला कर के हाइड्रोजन को समझते तब तो आजतक इंसानों की समझ में कुछ भी बढ़त नहीं हो पाती।
   तो इस समस्या का समाधान किया गया एक काल्पनिक गैस, "आदर्श गैस", को अपनी बुद्धि में ही, कल्पना में जन्म दे कर। एक बार जब हमने आदर्श गैस के आचरण को समझ लिए तब हमने कुछ सिद्धांतों का अविष्कार कर लिया। जैसे की "चार्ल्स लॉ" , " बॉयलस लॉ", और एक परिपोषित "गैस लॉ"।
   फिर इन सिद्धांत के प्रयोग से ही हमने अपने आस-पास के वास्तविक जीवन में विद्यमान सभी गैसों और मिश्रणों को समझना आरम्भ किया। अपनी आवश्यकता के अनुरूप "वंडर वाल करेक्शन " निर्मित किये और गैसों की दुनिया पर काबू पा लिया।
   आदर्शवाद में हमने एक आदर्श गैस का निर्माण किया था। उस पर आप सब "अत्यधिक आदर्शवादी ", "हवा में बाते करता है" , "कल्पनाओं की दुनिया में रहता है" , वगैरह का इलज़ाम लगा सकते थे।
   मगर उसी आदर्शवाद में से उत्सर्जित सिद्धान्तवाद पर यह इल्जाम लगाना संभव नहीं है। सिद्धान्तवाद वह परिथिति है जब सारी राजनीति का अंत हो जाता है। यहाँ वह 'परम निवारण' प्राप्त हो जाता है जब, जहाँ से हम प्रकृति को समझाना आरम्भ कर देते हैं। यहाँ नित नए निवारण और नित नए चैलेंज (समस्याएं) मिलती हैं।
   सिद्धान्तवाद वह सूत्र है जो हमे एक सूत्र में बाँध देता है। वह स्थान जहाँ से निकले तर्क हमे अपने विश्वासों और अंधविश्वासों दोनों से ही मुक्ति दे देता है और हमे तथ्यों की भूमि प्रदान करवाते है जिस पर एक दूसरे के साथ बिना किसी आपसी विवाद के एक सह-अस्तित्व कर सकें। यह विज्ञानवाद है, जिसमे सांप्रदायिक मान्यताओं का अस्तित्व स्वयम ही घट कर छोटा हो जाता है। हमे अपने धर्म और मजहब को त्यागने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती और इनका आकार स्वयं से ही घट कर इतना छोटा हो जाता है कि हम आपस में बिना किसी विवाद के रह सकें और तब भी एक सामान विचार, एक-रुपी निष्कार्ष रख लें।

   सिद्धान्तवाद तमान राजनीति, तमाम भिन्न-विचारधाराओं का अंत है, जब मानवों की अध्ययन बुद्धि अपनी समस्याओं को सुलझाने के काबिल बन जाती है।

Popular posts from this blog

BODMAS Rule सैद्धांतिक दृष्टि से क्या है?

The STCW 2010 Manila (Scam) Convention

Difference between Discretion and Decision making